SINGRAULI : बच्ची की मौत के बाद जिला चिकित्सालय में हंगामा

परिजनों ने स्टाफ नर्स व चिकित्सकों पर लगाया लापरवाही बरतने का आरोप,एक युवक ने स्वास्थ्य सेवकों के साथ किया अभद्रता,कोतवाली में अपराध दर्ज

सिंगरौली 18 जुलाई। सरई से उपचार के लिए जिला अस्पताल मासूम बच्ची का इलाज कराने पहुंचे परिजनों को उस समय निराशा हाथ लगी। जब उपचार के अभाव में मासूम बच्ची की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन शव लेने से इनकार कर दिया। काफी देर तक जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में हंगामा चलता रहा। इस दौरान मौके पर नायब तहसीलदार जान्हवी शुक्ला पहुंची थीं। दोपहर में हुई मौत के बाद बच्ची का शव जिला अस्पताल के वार्ड में शाम तक पड़ा रहा। परिजनों ने इस मौत का विरोध भी किया है, लेकिन देर शाम तक कोई चिकित्सक झांकने तक नहीं पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक सरई क्षेत्र से कछरा निवासी महेन्द्र कुशवाहा शनिवार की सुबह तीन वर्षीय मासूम बच्ची काजल कुशवाहा के पेट में दर्द होने के बाद उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां बच्चा वार्ड में भर्ती कराया। डॉ.एपी पटेल की देख-रेख में मासूम बच्ची का उपचार चल रहा था। दोपहर में अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। इस दौरान परिजन ड्यूटी स्टाफ नर्स को बुलाने पहुंचे और चौखट पर गिड़गिड़ाते रहे। लेकिन लापरवाह ड्यूटी नर्स परिजनों को वहां से यह कहकर भगा दिया कि बच्ची ठीक है तुम लोग क्या जानोगे। ठीक इसके कुछ ही देर बाद मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस दौरान जिला अस्पताल में एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं थे।

परिजनों पर बनाते रहे दवाब

परिजनों का आरोप है कि मासूम बच्ची की मौत के बाद परिजन शव लेने से इनकार कर रहे थे। इस दौरान स्टाफ नर्स व चिकित्सकों की ओर से परिजनों को दवाब बनाया जा रहा था। हैरानी बात यह है कि सीएमएचओ भी परिजनों पर दवाब बनाते रहे। लेकिन परिजन इस बात पर अड़े थे कि बच्ची हालत बिगडऩे के बाद चिकित्सक व ड्यटी नर्सों से मिन्नते करते रहे। मगर, कोई देखने तक नहीं आया। यदि कोई शिशु रोग चिकित्सक वार्ड में मौजूद रहा होता तो शायद मासूम बच्ची को बचाया जा सकता था।

अस्पताल की लचर व्यवस्था उजागर

मुख्य चिकित्सका एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एनके जैन की लचर व्यवस्था का नतीजा है कि मरीज उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। समस्याओं को अवगत कराने के बाद भी सीएमएचओ उसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। यदि जि मेदार ही लापरवाह हैं तो जाहिर सी बात है कि स्टाफ लापरवाही करेगा। कई बार फोन पर अवगत कराने के बाद भी सीएमएचओ अस्पताल की अव्यवस्था को देखने नहीं पहुंचे। जबकि उनके द्वारा बार-बार यही कहा जाता रहा कि डॉक्टर दिनभर नहीं बैठे रहेंगे।

इनका कहना है
बच्ची को जिला अस्पताल में 15 मिनट पहले भर्ती कराया गया था, चिकित्सकों ने उसकी हालत देखने के बाद ही भर्ती करने के लिए कहा था। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गयी। इसमें किसकी लापरवाही है इसकी जांच करायी जायेगी।
जान्हवी शुक्ला
नायब तहसीलदार, सिंगरौली

डेस्क रिपोर्ट

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