सिंगरौली: कोयला हाइवा डंपरों की वजह से लग रहा भीषण जाम जाम, नागरिक परेशान

मांग एवं आपूर्ति के मद्देनजर दिन रात बराबर जहां कोयला खदानों में कोयले का खनन/उत्पादन होता है, वहीं उत्पादित कोयले को दिनरात बराबर डिस्पैच भी किया जाता रहता है, परंतु एनसीएल प्रबंधन द्वारा सड़क मार्ग से कोयले की ढुलाई के लिए अलग से कोई सुरक्षित मार्ग नहीं बनाया।

सिंगरौली, 25 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के सबसे अधिक व्यस्ततम व महत्वपूर्ण विशाल औद्योगिक नगर जयंत में स्थानीय कोयला खदानों से कोयले की ढुलाई में लगे भारी हाइवा डंपरों की वजह से आयेदिन भीषण जाम की स्थितियां निर्मित होती रहती हैं तो वहीं सार्वजनिक सड़क मार्ग से डंपरों से दुर्घटनायें बढ़ी हैं।

विदित हो कि जिले में नार्दर्न कोलफील्ड्स लि. की अमलोरी, निगाही, जयंत तथा दुधीचुआ जैसी बड़ी ओपेन कास्ट कोयला खदानों से वृहद पैमाने पर उत्पादित होने वाले कोयले की जहां प्रचुर मात्रा में रेलवे के माध्यम से ढुलाई की जाती है, वहीं इसके अलावा सड़क मार्ग से भी वृहद मात्रा में कोयले का परिवहन होता है, जाहिर तौर पर कंपनी प्रबंधन के सामने भी कोयला उत्पादन में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी तथा उसकी उचित सप्लाई की चुनौतियां बनी रहती हैं। लिहाजा कोयले की मांग एवं आपूर्ति के मद्देनजर दिन रात बराबर जहां कोयला खदानों में कोयले का खनन/उत्पादन होता है, वहीं उत्पादित कोयले को दिनरात बराबर डिस्पैच भी किया जाता रहता है, परंतु एनसीएल प्रबंधन द्वारा सड़क मार्ग से कोयले की ढुलाई के लिए अलग से कोई सुरक्षित मार्ग नहीं बनाया।

एनसीएल प्रबंधन की अदूरदर्शिता की वजह से कंपनी में प्रोडक्शन एवं डिस्पैच की चुनौतियों को पूरा करने में आम नागरिकों की जिंदगी की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का तनिक भी ध्यान नहीं रखा गया। जिले की सिंगरौली, माड़ा, सरई तथा देवसर तहसीलों के सारी आम सड़कों में दिनरात बराबर हजारों की संख्या में भारी हाइवा डंपर सरपट दौड़ते रहते हैं। मुद्दे की बात की जाय तो कोयले के ट्रांसपोर्ट में दिनरात बराबर लगे भारी वाहनों के साथ उचित बरताव नहीं किया जा रहा है।

एनसीएल प्रबंधन की निष्क्रियता की वजह से कोयला ट्रांसपोर्टर्स भी खासा शोषण का शिकार हो रहे हैं तथा परेशानी झेल रहे हैं। कोयले की ढुलाई के लिए अलग से स्थायी सड़क मार्ग न होने के कारण रोज सड़क दुर्घटनायें बढ़ती जा रही हैं और आयेदिन सड़क जाम की स्थितियां बनी रहती हैं। मुख्य सड़क मार्गों में धूल के गुब्बारे छाये रहते हैं। ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों मे सड़क है, कुछ अंदाजा ही नहीं हो पाता। सड़कों की कभी ही मरम्मत नहीं होती।

कोयले के ट्रांसपोर्ट के लिए स्थायी तौर पर कोई निश्चित रूट तथा उचित भाड़े का ही निर्धारण नहीं होता। आरोप है कि जिले के जिम्मेदार अधिकारी कोयले के परिवहन का मनमानी रूट तय करते हैं। जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लगे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सड़कों पर कोयले की धूल की वजह से भी दुर्घटनायें हो रही हैं। शासन प्रशासन का अंधा कानून भी ट्रासपोर्टर्स के लिए आफत बना रहता है। कुलमिलाकर इन तमाम विषम परिस्थितियों के लिए जिले की यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।

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यद्यपि कोयला परिवहन से जुड़ीं तमाम विषम परिस्थितियों से जहां जिला प्रशासन भी पूरी तरह से अवगत है, तो वहीं सभी दलों से जुड़े छोटे बड़े सभी स्थानीय जनप्रतिनिधि भी। परंतु एनसीएल की टालमटोल की नीति सभी फर भारी पड़ रही है। जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित एनसीएल प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों से इस दिशा में अविलंब ठोस व उचित कार्यवाही की जन अपेक्षा की गई है।

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डेस्क रिपोर्ट

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