38 वर्षों से यहाँ नहीं जन्मा कोई बच्चा, बंदूक की सलामी ना मिलने कुलदेवता है नाराज

हम सभी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से पूरी तरह वाकिफ हैं अंधविश्वास नहीं बल्कि यहां ऐसी मान्यताएं हैं जो कई बार विज्ञान को भी आश्चर्यचकित कर देती हैं कुछ ऐसा ही हो रहा है मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जहां 38 वर्षों से कुलदेवता बंदूक की सलामी ना मिलने से नाराज हैं और यह एक समुदाय विशेष को संतान सुख से वंचित कर रखा है हैरान कर देने वाली इस खबर की वाली सच्चाई जानते हैं

38 वर्षों से बच्चें ही पैदा नहीं हो रहें है

मध्यप्रदेश के सीधी में जंगलों के बीच आज भी ऐसा गाँव है जहा बंदूक ना होने की बजह से पिछले 38 सालों से बच्चों की किलकारी नहीं गूज रहीं है, 400 से अधिक आबादी बाले गाँव में एक जाति खैरवार है जो वर्षों से बच्चों की किलकारी के लिये तरस रहें है, बताया जाता है की इस गाँव में एक भी बंदूक ना होने की वजह से शारदेय नवरात्रि के दशहरे के दिन ग्राम देवता को बंदूक से सलामी नहीं मिल रहीं जिस वजह से खैरबार समाज के 40 से अधिक परिवार में 38 वर्षों से बच्चें ही पैदा नहीं हो रहें है, इस समाज में क्या बूढ़े क्या बुजुर्ग सभी संतान के लिए तरसते है

38 वर्षों से बच्चें ही पैदा नहीं हो रहें है
38 वर्षों से बच्चें ही पैदा नहीं हो रहें है

38 वर्षों से बच्चें ही पैदा नहीं हो रहें है, इस गांव के सबसे बुजुर्ग जनकी सिंह जिसकी उम्र 70 साल है. उन्होंने बताया कि यहाँ पीपल में ग्राम देवता जिसे स्थानीय भाषा मे अंगारा मोती कहते हैं, वह नाराज हो गए है. पीपल की जड़ में बकरा, मुर्गा का खून से देवता नाराज हैं. यही वजह है कि क्या बूढ़ा, क्या जवान किसी को बच्चा नहीं हुआ. जबकि तकरीबन 15 बर्ष पहलें जिला कलेक्टर द्वारा गाँव में एक व्यकि को बंदूक देकर ग्राम देवता को बंदूक से सलामी दिये थें जिसके बाद उसके घर में एक बच्चा पैदा हुआ था,लेकिन प्रसासन ने फिर वह बंदूक वापस लें ली जिसके बाद से बच्चे पैदा नहीं हो रहें है,अगर प्रसान बंदूक से गांव में दशहरे के दिन ग्राम देवता को सलामी दे दिया जाय तो फिर से बच्चें पैदा होना शुरु हो सकतें है,

इस मामले में एकीकृत महिला बाल विकास परियोजना कुसमी के प्रसासक ने बतया की सीधी सिंगरौली जिला मिलाकर 40 हजार से अधिक खैरवार समाज की आवादी है,जिसमें हर्रई ही एक ऐसा गाँव है जहाँ 38 वर्षों से खैरवार समाज को लोगों के बच्चें पैदा नहीं होते थें,अन्य सभी उसी गाँव मे निवास कर रहें लोगों के बच्चें पैदा होतें है,60 दशक के आसपास से वहां बच्चें पैदा नही हो रहें है, भोपाल की एक टीम और आदिवासी बिभाग की रिसर्च टीम और दिल्ली की टीम ने रिसर्च किया उस समय जिला कलेक्टर पंकज अग्रवाल ने गाँव का भ्रमण किया गाँव वालों की जो मान्यताएं थी उसे उन्होंने पूरा भी किया जिसके बाद से बच्चे पैदा हुये थें,2015-16 में सीधी कलेक्टर रहें विशेष गढ़पाले ने गांव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर पूरा प्रयास किया था जिसमें कुछ लोगों को लाभ भी मिला और अब बच्चे पैदा होने भी लगे हैं।

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बहरहाल हर्रई गांव के रहवासी आज भी अंधविश्वास के जाल में इस कदर फंसे हुए हैं कि इनका विश्वास है कि घर में बंदूक रख लेने से बच्चे होने लगते हैं, 2001 में तत्कालीन कलेक्टर पंकज अग्रवाल द्वारा एक परिवार को बंदूक आवंटन की गई थी तो आज उस घर में बच्चे पैदा हुए हैं,लेकिन कुछ दिन बाद प्रसासन ने बंदूक वापस ले ली तब से गाँव मे बंदूक नहीं है,जिससे अब 38 वर्षों से बच्चें पैदा नहीं हो रहें है

सतना न्यूज डेस्क

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