अभ्यारण्य जंगल में गिट्टी,पत्थरों का उत्खनन कारोबार जोरो पर

सिंगरौली 21 सितम्बर। संजय नेशनल पार्क अभ्यारण्य क्षेत्र बगदरा के बीट बरगवां सैंडरिया बहरा में गिट्टी का अवैध तोड़ाई व परिवहन व्यापक पैमाने पर चल रहा है। शिकायत के बावजूद नेशनल पार्क अभ्यारण्य के डिप्टी रेंजर व फारेस्ट गार्ड ने जांच कर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करते हुए उल्टा शिकायत कर्ताओं को ही धमका चमका रहे हैं। नेशनल पार्क अमले के इस कृत्य से आम जनों में भी असंतोष बढ़ रहा है। वहीं गौण खनिज के अवैध उत्खनन कारोबारियों के हौंसले भी बुलंद हो रहे हैं।

ग्राम पंचायत बकिया के कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीट बरगवां के सैंडरिया बहरा जंगल के पहाड़ में हैण्ड ब्रोकेन गिट्टियों का धड़ल्ले के साथ थोड़ाई हो रही है। करीब सौ ट्राली से अधिक गिट्टियों का अवैध भण्डारण भी उक्त जंगल में हुआ है। इसकी भली-भांति जानकारी ग्रामीणजनों के द्वारा सहायक वन परिक्षेत्राधिकारी व बीट गार्ड को दिया गया। पिछले दिनों जांच के नाम पर कोरमपूर्ति करते हुए उक्त दोनों अधिकारी ग्रामीणों को उल्टा डरा धमकाकर चले गये और वन कर्मियों के स्थल निरीक्षण करने के बाद गौण खनिज का और तेजी से उत्खनन, परिवहन हो रहा है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि सहायक वन परिक्षेत्राधिकारी व बीटगार्ड की मिलीभगत से संजय नेशनल पार्क के जंगल में गिट्टियों का उत्खनन, परिवहन किया जा रहा है। दबंग के आगे ग्रामीण भी खुलकर शिकायत करने से परहेज करते हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि साक्ष्य के रूप में अभी भी भारी मात्रा में उक्त जंगल में गिट्टिया पड़ी हुई है और टै्रक्टर परिवहन करने में लगा हुआ है। यदि कोई विरोध किया तो वन अमला ही किसी न किसी वन प्रकरण में फसा देने की धमकी देते हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि गिट्टियों के अवैध उत्खनन, परिवहन के साथ-साथ पेंड़ों की अंधाधुंध कटाई भी हो रही है। माफियाओं पर संजय नेशनल पार्क अभ्यारण्य बगदरा का अमला मेहरबान है। जिसके चलते अब दबंग कारोबारी के आगे सरकारी अमला भी बेवश नजर आ रहा है।

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सूत्रों के अनुसार संजय नेशनल पार्क अभ्यारण्य बगदरा के द्वारा अपने वरिष्ठ कार्यालय को प्रत्येक माह यही जानकारी दी जा रही है कि क्षेत्र में कहीं भी अवैध उत्खनन व पेड़ों की कटाई नहीं हो रही है। सबसे बड़ा उदाहरण बरगवां बीट का है। जहां गिट्टियों का अवैध उत्खनन, परिवहन धड़ल्ले से हो रहा है। वहंी कैमोर जंगल उजड़ गया। सोन नदी से करोड़ों रूपये के रेत चोरी हो गये, किन्तु अमूमन सोन घडिय़ाल व नेशनल पार्क अभ्यारण्य अवैध उत्खनन मान नहीं रहा है और वरिष्ठ कार्यालयों को कार्यालय में झूठी जानकारी दिये जाने के भी आरोप लगाये जा रहे हैं।

डेस्क रिपोर्ट

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