Gandhi Jayanti Special: Satna News- एमपी के इस गांव में आज भी चलता है गांधीजी का चरखा

Gandhi Jayanti Special: Satna News- मध्‍यप्रदेश के सतना जिले में एक ऐसा गांव है जहा आज भी हर घर से चरखे की आवाज सुनाई देती है, यहां के लोग आज के दौर में भी चरखे की मदद से सूत काटते हैं और कंबल आदि बनाते है। करीब 25 सौ आबादी वाले इस गांव का नाम सुलखमा है। जिस चरखे का इस्तेमाल गांधी जी ने देश के शोषण को रोकने के लिए हथियार के रुप में किया था, वो चरखा आज भी सतना जिले के सुलखमा गांव के लोगों की जीविका का साधन बना हुआ है.

Gandhi Jayanti Special: Satna News- एमपी के इस गांव में आज भी चलता है गांधीजी का चरखा
Photo By Google

Gandhi Jayanti Special: यहां के लगभग 125 परिवार बापू के दिखाए रास्ते पर आज भी चलते है, ये लोग चरखा चलाकर उससे बनाए हुए कंबल की आय से अपना गुजारा चलाते हैं, लेकिन आज के इस आधुनिक दौर में कंबलों के दम पर इनका गुजारा मुश्किल से हो रहा है, लेकिन यहा के लोग आज भी विरासत मिली बापू की यादे बचाने हुए है।

Gandhi Jayanti Special: Satna News- एमपी के इस गांव में आज भी चलता है गांधीजी का चरखा
Photo By Google

इस गांव के हर घरों में चरखे की आवाज सुनाई देती है

Gandhi Jayanti Special: सतना जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर बसा स्वावलंबन की प्रथा को बनाए रखने वाले इस गांव के लगभग हर घर में एक चरखा चलाया जाता है। पाल जाति बाहुल्य इस गांव की यह परम्परा महात्मा गांधी के सिखाए पाठ की देन है। चरखे से कंबल बनाकर यहां के लोग बेचते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। इनका काम भी बंटा हुआ है।

Gandhi Jayanti Special: Satna News- एमपी के इस गांव में आज भी चलता है गांधीजी का चरखा
Photo By Google

Gandhi Jayanti Special: चरखा चलाकर सूत कातने का काम घर की महिलाओं का होता है जो घर के बाकी काम निपटाकर खाली समय में चरखे से सूत तैयार करतीं हैं। इसके बाद का काम घर के पुरूषों का होता है जो इस सूत से कंबल और बाकी चीजें बुनने का काम करते हैं। इन सब के बीच भले ही जो समस्या हों पर यहां के लोग खुश हैं और गर्व के साथ इस परंपरा को जीवित किए हुए हैं।

Gandhi Jayanti Special: Satna News- एमपी के इस गांव में आज भी चलता है गांधीजी का चरखा
Photo By Google

इसे भी पढ़े-Satna News: तेज रफ्तार ऑटो खाई में पलटा, 8 लोग घायल, मां शारदा के दर्शन करने जा रहे थे मैहर

Gandhi Jayanti Special: पर बजुर्गों की परम्परा आधारित ये रोजगार या यूं कहें विरासत अब कमजोर होने लगी है, क्योंकि कई दिनों तक चरखा कातने और बुनने के बाद भी इन लोगों को पूरी मजदूरी नहीं मिल पाती है, ग्रामीणों का कहना है कि वह बापू की विरासत को तो संभाले हुए हैं, लेकिन उनका गांव और उनकी यह कला आज भी पहचान की मोहताज है, क्योंकि उन्हें शासन मिलने वाली मदद मिल नहीं पा रही है।

Article By Sunil

संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please off your adblocker and support us