मुख्यमंत्री शिवराज की बात नहीं मानी भाजपा के इस नेता ने, कल है अंतिम मौका

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के पुत्र पुष्पराज बागरी को मनाने की नाकाम कोशिश तो की है लेकिन अभी तक पुष्पराज बागरी और उनके छोटे भाई की पत्नी वंदना बागरी ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है

सतना । रैगांव विधानसभा के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। पिछले दिनों सतना पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के पुत्र पुष्पराज बागरी को मनाने की नाकाम कोशिश तो की है लेकिन अभी तक पुष्पराज बागरी और उनके छोटे भाई की पत्नी वंदना बागरी ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज की बात नहीं मानी भाजपा के इस नेता ने, कल है अंतिम मौका
मुख्यमंत्री शिवराज की बात नहीं मानी भाजपा के इस नेता ने, कल है अंतिम मौका

नामांकन पत्र वापस लेने का कल अंतिम दिन है और अगर भाजपा के दोनों बागी उम्मीदवार नामांकन पत्र वापस नहीं लेते हैं तो भाजपा की मुश्किल बढ़ सकती है। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने अपनी चुनावी सभाओं में भाषण देकर सनसनी फैला दी कि अगर पुष्प राज बागरी को अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो वह कांग्रेस की कल्पना वर्मा को चुनाव जिताएं।

जुगल किशोर बागरी की पुत्र वधू बंदना बागरी ने कहा कि उनके ससुर ने 40 साल तक पार्टी और जनता की सेवा की मैं भी ससुर के साथ क्षेत्र की जनता से मिलती रही, हम लोगों ने पूरी निष्ठा के साथ काम किया है। हमने टिकट की मांग की थी लेकिन पार्टी ने नया कैंडिडेट खड़ा कर दिया जिससे क्षेत्र की जनता जानती नहीं है।

हालांकि भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि वह पार्टी के बागी उम्मीदवारों को मनाने में कामयाब हो जाएंगी, लेकिन जिस तरीके से स्वर्गीय जुगल किशोर बागरी की पुत्र वधू ने बागी तेवर अपना रखा है उससे पार्टी को नुकसान होना साफ नजर आ रहा है क्योंकि स्वर्गी बागरी के बड़े पुत्र पुष्पराज बागरी ने भी अभी तक अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है।

भारतीय जनता पार्टी के बागी उम्मीदवारों की वजह से कांग्रेश कोड बैठे बताएं एक मुद्दा मिल गया है और कांग्रेस से बनाने में लगी हुई है हालांकि कांग्रेश के लिए भी रहे गांव कारण आसान नहीं बहरहाल अगर भाजपा में इसी तरह की स्थिति बनी रहती है तो उसे भी रैगांव के चुनावी मैदान में जीत हासिल करना आसान नहीं होगा।

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बाहर हाल स्थितियां यह बताती हैं कि दोनों ही पार्टियों को जनता के बीच विश्वास पैदा करने के लिए खासी मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि जनता ने दोनों दलों को मौका दिया लेकिन किसी भी पार्टी ने उनकी उम्मीदों के अनुरूप का कार्य नहीं किया है।

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संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

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