सतना के छात्र ने किया अविष्कार, नजदीक आये तो बजेगी घण्टी

बीटेक के स्टूडेंट ने बनाई कोविड प्रोटेक्शन डिवाइस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस्तेमाल से बना है सोशल डिस्टेंसिंग अलर्ट गैजेट

सतना |  एकेएस यूनिवर्सिटी के बीटेक कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के एक मेधावी स्टूडेंट शुभम सोनी ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस्तेमाल से एक सोशल डिस्टेंसिग अलर्ट गैजेट तैयार करने में बड़ी कामयाबी पाई है। कोविड की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर शुभम की इस कोविड प्रोटेक्शन डिवाइस का बजर एक मीटर की दूरी कम होते ही रेड लाइट के साथ बीप देकर अलर्ट करता है। इसे एंड्रायड आईओएस डिवाइस से भी कंट्रोल किया जा सकता है।

बहुउपयोगी डिवाइस
बहुउपयोगी डिवाइस

सतना जिले के भटनवारा गांव के एक सामान्य परिवार में जन्मे इस कुशाग्र छात्र के मुताबिक लीक से हटकर कुछ खास करने का ख्याल तब आया जब वह टोटल लॉकडाउन के कारण अपने चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी नहीं जा पा रहा था। यह वह दौर था जब जानलेवा महामारी के बचाव के लिए हर तरफ सोशल डिस्टेंसिंग, मॉस्क और सेनिटाइजर के उपयोग का शोर था। इसी दौरान शुभम सोनी ने एक ऐसी डिवाइस तैयार करने की ठानी जो हर वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का अलर्ट देकर आगाह करती रहे। बीटेक (सीएसई) के फिफ्थ सेमेस्टर के स्टूडेंट की इस तकनीकी इजाद से जन्मे सोशल डिस्टेंसिग अलर्ट डिवाइस को विश्वविद्यालय के प्रोडक्शन प्लान में शामिल करते हुए इसे बहुउपयोगी डिवाइस के रुप में विकसित किया जाएगा। डिवाइस में अभी टेम्प्रेचर सेंसर लगाने की भी तैयारी चल रही है।

 एचओडी डॉ. अखिलेश बाऊ और अन्य प्रोफ़ेसर
एचओडी डॉ. अखिलेश बाऊ और अन्य प्रोफ़ेसर

छात्र शुभम सोनी ने बताया कि एक सोशल डिस्टेंस अलर्ट डिवाइस बनाया है। अगर हम किसी पब्लिक प्लेस में जाते हैं तो इसको हम आईडी कार्ड की तरह गले में लगा सकते हैं। अगर किसी पर्सन के पास जाते हैं और वन मीटर की डिस्टेंस मेंटेन नहीं किये हैं तो ये डिवाइस हमको एंड्रॉयड एप में भी अलर्ट करेगी और आईओएस एप में भी अलर्ट करेगी और आन स्पॉट बीप से भी अलर्ट करेगी। रेड लाइट भी ऑन हो जाएगी। इससे हमें अलर्ट मिल जाएगा और जिस पर्सन के हम करीब जा रहे हैं उससे डिस्टेंस मेंटेन कर सकते हैं।

फ्यूचर में इसमें हम बहुत सारे अपग्रेडेशन ला रहे हैं। इसमें टेम्प्रेचर सेंसर यूज़ कर रहे हैं ताकि जिस पर्सन के पास हम जा रहे हैं उसका टेम्प्रेचर भी सेंस कर सके। उसके कोविड के सिम्पटम्स का पता लगा सकें और उससे दूरी बना सकें। इसको बनाने में लगभग 1 महीने का समय लगा। अभी इसकी कास्ट डेढ़ सौ रुपये आई है मगर अगर इसे बल्क में तैयार करेंगे तो एक डिवाइस की 100 रुपए कास्ट आएगी।

एकेएस यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अखिलेश बाऊ ने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर साइंस पूरे देश में ऑपरेटिंग सिस्टम का काम करता है। कोविड-19 के इस ड्यूरेशन में भी बच्चे के लिए ये जो डिवाइस आई है इसको हम दुनिया के सामने ले जा सकते हैं और सोशल डिस्टेंस की प्रॉब्लम का जो हम सुनते रहते हैं उसको हम काफी हद तक रिमूव कर सकते हैं।

डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस पूरी कोशिश करता है कि ऐसे बच्चे आगे आएं और ऐसी चीजों को मूर्तरूप दिया जा सके। हम पेटेंट कराने की पूरी प्रोसेस में हैं। हमारी ये कोशिश है कि इसमें अगर हम और सेंसर जोड़ सकें जैसे टेम्प्रेचर या पल्सेस भी हम आइडेंटिटीफाई कर सकें तो हम इसके पेटेंट कराने की दिशा में अग्रसर हैं।

संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

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