SATNA मै कुछ भी कर सकता हूं… कहा तहसीलदार बी के मिश्रा ने

satna news माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के एक फैसले पर अमल न हो इसके लिये रघुराज नगर के मौजूदा तहसीलदार बी के मिश्रा ने यहां के पूर्व तहसीलदार मानवेंद्र सिंह के अंतरिम आदेश को भी पलट देने का मन बना लिया है अब सवाल यह उठता है कि आखिर माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के पालन मे अनावश्यक रोड़े अटकाकर तहसीलदार बी के मिश्रा किसे फायदा पहुंचाना चाहते ?

हासिल जानकारी के मुताबिक मामला रीवा रोड की एक बेशकीमती आराजी का है कोई बीस साल पुराने इस मामले मे पहला फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोपाल श्रीवास्तव जी की अदालत से आया था जिसमे रीवा रोड बम्हनगवां की 17004 वर्गफीट भूमि मे से 2464 भूखंड का मालिक इंदु शुक्ला को घोषित किया गया था और शेष बची 14540 वर्ग फीट भूमि के मालिक अन्य पांच लोग घोषित किये गये थे बाद मे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट मे अपील हुई थी जिसमे अपीलार्थी अरुण शुक्ला ने प्रतिवादी क्रमांक 5 इंदु शुक्ला की 2464 वर्गभूमि मे अपने 1/5 हिस्से की सहायता चाही थी

बताया गया कि प्रतिवादी क्रमांक 5 इंदु शुक्ला ने स्वेच्छा से अपने स्वत्व वा अधिपत्य की 2464 वर्ग भूमि मे से अपीलार्थी को पांचवा हिस्सा देने के लिये तैयार हो ग ई थी लिहाजा अपील का निराकरण करते हुये माननीय उच्च न्यायालय ने एक डिक्री जारी कर प्रतिवादी क्रमांक 5 इंदु शुक्ला को आदेशित किया था कि इंदु शुक्ला अपने स्वत्व की 2464 वर्ग फीट आराजी मे से 1/5 हिस्सा अर्थात 492 वर्ग फीट भूमि अपीलार्थी अरुण शुक्ला को दें।

आगे माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक13-12-2018 के पालन के लिये इंदु शुक्ला रघुराज तहसीलदार के यहां एक आवेदन देकर खसरे मे अपना नाम दर्ज किये जाने और अपने स्वत्व की आराजी मे से पांचवा हिस्सा अपीलार्थी अरूण शुक्ला को दिये जाने की प्रार्थना करती हैं

मगर पहले रघुराज नगर के तहसीलदार मानवेंद्र सिंह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतना व माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के क्रियान्वयन को रोक कर रखते है
और टेलीफोनिक बातचीत मे वे स्वीकार भी करते हैं कि माननीय उच्च न्यायालय के फैसले पर अमल ना हो इसके लिये अपीलार्थी अरुण शुक्ला उन्हे फोन करवाता था ..
. अरूण शुक्ला किससे फोन करवाता था यह तो उन्होने नही बताया अलबत्ता यहां के पूर्व तहसीलदार मानवेंद्र सिंह ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय की डिक्री देखने के बाद उन्होने इस प्रकरण मे तुरंत कार्यवाही की और आर आई का प्रतिवेदन मंगा लिया था मगर चूंकि उनका स्थानांतरण हो गया इसलिये वे इस मामले मे अंतिम आदेश नही कर पाये थे

गौरतलब बात यह है कि इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद रघुराजनगर के तहसील दार बी के मिश्रा ने माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के क्रियान्यवन पर फिलहाल ग्रहण लगा दिया है

तहसील दार बी के मिश्रा ने यह सब क्यों किया ?

सूत्र बतलाते है कि बी के मिश्रा तहसीलदार ने अपने ससुराल वालो के कहने पर माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के क्रियान्वयन को फिलहाल टाल दिया है लोगो की माने तो तहसीलदार बी के मिश्रा की ससुराल सतना के प्रेमनगर मे रहने वाले किसी पांडे परिवार मे है । उन्ही लोगो के कहने पर हाईकोर्ट के फैसले पर अमल की कार्यवाही रोक दी ग ई है बताया गया है कि अंतिम निर्णय करने से पहले तहसीलदार बी के मिश्रा इस मामले मे शासकीय अधिवक्ता का ओपिनियन मांगा है ..

यहां यह बतलाते चलें कि रघुराजनगर के पूर्व तहसीलदार मानवेंद्र सिंह ने सभी आपत्तियों का निराकरण करते हुये 27-7-2020 को एक अंतरिम आदेश जारी कर आर आई को प्रतिवेदन देने के लिये कहा था मगर भर्रे शाही का आलम यह है कि मौजूदा तहसीलदार बी के मिश्रा पूर्व तहसीलदार मानवेंद्रसिंह के आदेश को ही पलटने मे लगे हुये है जबकि कानून के जानकार बताते है कि तहसीलदार अपने समकक्ष अधिकारी के आदेश को पलटने का कानूनी अधिकार नही रखते है लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी के तथा कथित रिश्तेदार रघुराज नगर के तहसीलदार बी के मिश्रा ने कहा कि वे कुछ भी कर सकते है …..

डेस्क रिपोर्ट

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