सतना “नगर” का दंगल, पढिये क्या खत्म होगा कांग्रेस का बनवास SATNA NEWS

सतना 16 दिसंबर । महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण के बाद सतना में राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं भाजपा के सामने जहां चुनौती अपनी प्रतिष्ठा बचाने की होगी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अपना 20 साल का बनवास खत्म करने का की जुगत में लगी हुई है इस बार कांग्रेस को उम्मीद है कि वह मेयर चुनाव में फतह हासिल करेगी

नगरी निकाय चुनाव की तारीख है भले ही घोषित ना हुई हो लेकिन महापौर और अध्यक्ष के पदों के आरक्षण के बाद राजनीतिक सरगर्मियां सतना में तेज हो गई हैं जो चेहरे पिछले कुछ समय से राजनीतिक तौर पर गायब थे वह एकाएक सक्रिय नजर आने लगे हैं सोशल मीडिया में वह और उनके समर्थक दावेदारी दर्शन आने लगे हैं आगामी समय में होने वाले नगरी निकाय चुनाव में जहां भाजपा पिछले कार्य काल का इतिहास दोहराना चाहेगी वहीं कांग्रेस के सामने प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती होगी

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यहां उल्लेखनीय है कि नगर निगम समेत जिले में 12 नगरी निकाय हैं जिनमें नगर निगम समेत 10 नगरीय निकायों में भाजपा का कब्जा है मात्र दो में कांग्रेस के अध्यक्ष हैं वह भी दोनों धार्मिक स्थल हैं यह अलग बात है कि नगर पालिका मैहर को छोड़कर सभी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है 1995 में नगर निगम के मेयर के रूप में राजाराम त्रिपाठी विजई हुए थे नगर निगम चुनाव से इस बार कांग्रेस को खासी उम्मीदें हैं 15 साल बाद यानी 2018 विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस का विधायक चुना गया पार्टी को उम्मीद है कि 20 साल बाद एक बार फिर नगर निगम की कुर्सी उनकी होगी 16 जनवरी 1995 को पार्टी के राजाराम त्रिपाठी नगर निगम के महापौर चुने गए थे पार्षदों के जरिए महापौर चुने गए त्रिपाठी का कार्यकाल 10 जनवरी 2000 तक रहा इसके बाद से निगम में कांग्रेस का मेयर नहीं बना इस चुनाव में पार्टी को उम्मीद है कि जिस तरह से कांग्रेस अपना विधायक बनाने में सफल रही है उसी तरह मेयर भी बनवा पाएगी

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बसपा को भी हैं उम्मीदें आरक्षण के साथ ही राजनीतिक दलों के दावेदारों की चर्चाएं होने लगी है प्रमुखता से भाजपा और कांग्रेस के दावेदारों की चर्चा है लेकिन इस बीच बसपा भी तैयारी कर रही है 2010 के महापौर का चुनाव में राजनैतिक अनुमानों को धता बताते हुए बसपा के पुष्कर सिंह तोमर निर्वाचित हुए थे ऐसी परिस्थितियां बनी थी कि उस वक्त भाजपा के प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी इस वजह से बसपा को भी नगरी निकाय चुनावों में खासी उम्मीदें हैं

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बहरहाल आने वाला वक्त बताएगा कि मेयर की कुर्सी किसकी होगी लेकिन एक बात और यहां जानने योग्य है कि सतना जिले के नगर निगम महापौर का इतिहास ठीक नहीं रहा है क्योंकि महापौर बनने के बाद ऐसा राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उसका राजनीतिक भविष्य लगभग खत्म सा हो जाता है कई महापौर इसके गवाह हैं

संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

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