यहाँ ग्राहक नहीं मिले तो जानवरो को खिला रहे है हरी सब्जिया

जहां भूख है वहां भोजन नहीं, जहां भोजन हैं वहां कोई खाने वाला नहीं. जहां दुकानें हैं वहां कोई ग्राहक नहीं और जहां ग्राहक हैं वहां कोई सामान नहीं. ये मजबूरी, बेबसी और लाचारी इसके सिवा कुछ भी नहीं, कोरोना वायरस के संकट में सब कुछ अस्त-व्यस्त सा हो गया है जिसकी मार सभी वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ रही है इसमें जहां ग्राहकों को परेशानी हो रही है वहीं दुकानदार भी इससे अछूते नहीं हैं। ऐसे ही हैं सब्जी के दुकानदार जिनके पास ग्राहकों की कमी होने की वजह से सब्जियों का सही दाम नहीं मिल पा रहा है लिहाजा उन्हें सब्जियां जानवरों के सामने फेक नहीं पड़ रही हैं।

जानवरो को खिला रहे है हरी सब्जिया
जानवरो को खिला रहे है हरी सब्जिया

जरा इस तस्वीर को देखिए यह सतना के वेंकट स्कूल मैदान में लगी सब्जी मंडी का नजारा है जहां सब्जी व्यापारी सही दाम न मिल पाने की वजह से सब्जियों को मवेशियों के सामने डाल रहे हैं। अभी से मजबूरी कहें या लाचारी किए सब्जी दुकानदार जिन्होंने कड़ी मेहनत से इन सब्जियों की पैदावार की और फिर मंडी में इसे बेचने के लिए लेकर आए लेकिन लाभ डाउन की वजह से इक्का-दुक्का ग्राहक है आ रहे हैं जिसकी वजह से सब्जियां बिक नहीं पा रही हैं यहां तक कि सब्जी दुकानदार औने पौने दामों में सब्जियां बेचने में लगे हुए हैं इसके बाद भी इन सब्जियों का खरीदार नहीं है। खासतौर पर हरी सब्जियां एक-दो दिन से ज्यादा टिक नहीं पाती और खराब हो जाती हैं जिससे किसान की मेहनत भी बेकार जा रही है ऐसे में सब्जी दुकानदार अपनी सब्जियों को मवेशियों को खिलाकर अपनी बेबसी के आंसू रो रहे हैं।

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संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

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