बिजली के लिए तरसता गाँव, खंभे है पर बिजली नही

सतना 13 सितंबर । सतना जिले के रामपुर बाघेलान अंतर्गत ऐसे कई ग्राम पंचायतें हैं जहां अभी भी लोग अंधेरे में रहकर अपना गुजारा कर रहे हैं इस कोरोना महामारी के चलते सरकार ने तो लोगों को घर से बाहर ना निकालने के लिए आदेश जारी कर दिया था लेकिन 6 महीने से इस गर्मी में लोगों का बिगर बिजली के क्या हाल हुआ होगा जरा सरकार इस पर भी सोच विचार नहीं कि लगातार ग्रामीण जनता शिकायत गुहार लगाई लेकिन कोई भी नेता या प्रशासनिक अधिकारी ध्यान नहीं दिया

ऐसा ही मामला ग्राम इटमा कोठार सेमरा हरिजन बस्ती सेलहना ऐसी कई ग्राम पंचायत हैं जहां हरिजन आदिवासी बस्ती के लोग रह रहे हैं ट्रांसफॉर्मर लगा हुआ है वह 1 वर्ष से जला हुआ है जो उनके बच्चे अंधेरे में चीवनी के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं और तो और इस महंगाई के चलते ₹ 90 प्रति लीटर पेट्रोल खरीद कर अपने घर का उजाला करते हैं सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस मौसम में मच्छरों का आतंक रहता है जिससे कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं कई लोगों की हालत भी गंभीर हो चुकी आप देख सकते हैं कि इस गांव के लोगों का क्या हाल होता होगा जो ट्रांसफार्मर भी एक लगाया गया है वहां से सप्लाई नहीं बढ़ाई गई जिस कारण यह हरिजन लोग अपने घर की बिजली नहीं जला सके और 1 वर्ष से इनकी बिजली नहीं चल रही उसके बाद भी लगातार बिजली का बिल विद्युत विभाग द्वारा भेजा जा रहा है

अंधेरे में जिंदगी
अंधेरे में जिंदगी

कई बार पेपर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा भी प्रकाशित खबर दिखाई गई उसके बाद भी देख कर अनदेखा कर देते हैं क्या इन पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकती है सरकार विद्युत विभाग को पैसा दे रहा है दूसरा मामला इटमा कोठार का है जहां हरिजन आदिवासी लोग रह रहे हैं सबसे बड़ी बात तो यह है कि इटमा कोठार के ग्राम पंचायत के सामने ही ट्रांसफार्मर जला हुआ है और वहां के लोगों का बिजली का बिल भी झुकता है उसके बाद भी अभी तक ट्रांसफार्मर 6 महीने से नहीं लगाया गया ग्रामीणों का कहना है कि हम लोगों से बिजली का बिल तो चुकता करवा लेते हैं

लेकिन मनमानी तरीके से हमारे यहां ट्रांसफॉर्मर नहीं लगा रहे 70 साल के आजादी के बाद भी अभी भी सरकार घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम नहीं करवा पा रही है क्या ग्रामीणों का कसूर रहता है अगर ऐसा ही ग्रामीण सब कुछ अपने दम पर कर ले तो मतदान ही क्यों करता है साथ में ग्रामीणों का कहना है कि जब हम लोग हड़ताल अनशन करते हैं तो हमारी मांगे पूरी होती है तो हम किस बात पर अपना मतदान करें जब कोई नेता ही नहीं सुनता
ना तो हैंडपंप ना बिजली पानी पीने के लिए भी लोग तरस रहे आखिरकार कब तक चलेगी मनमौजी आखिरकार जनता अगला कदम उठाने पर मजबूर और बेबस है इस पर अगर गंभीरता से शासन प्रशासन नहीं लेता तो ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग बहुत बड़ा कदम उठा सकते हैं जिस पर शासन प्रशासन की जिम्मेदारी और विद्युत विभाग की जिम्मेदारी होगी

इनका क्या कहना
नंदकिशोर सिंह पटेल नंदू समाजसेवी ओबीसी समाज विधानसभा अध्यक्ष रामपुर बघेलान
हमने कई बार विद्युत विभाग और प्रशासनिक अधिकारी और नेताओं को सूचित किया लेकिन उसके बाद भी आज तक बिजली का सुधार नहीं किया गया जिससे ग्रामीण जनता का काफी नुकसान समस्या और पानी पीने तक के लिए समस्या बनी हुई है हम इस संघर्ष लड़ाई जब तक पूर्ण नहीं हो जाती तो बंद नहीं करेंगे हमारा संघर्ष जारी रहेगा

गयादीन पटेल इटमा कोठार
हमारे द्वारा कई बार प्रशासनिक अधिकारी को सूचित किया गया और 181 पर शिकायत की गई उसके बाद हमने कई लोगों से बिजली का बिल भी झुकती कराया जिसके बाद भी यह ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया हमारी फसलें सूख गई जिसका जिम्मेदार विद्युत विभाग और प्रशासन का है जो हमारा नुकसान हुआ है उस पर हम क्या करें जो गरीब लोग पानी पीने तक के लिए तरस रहे हैं गर्मी के मौसम में मच्छरों का काटने से मलेरिया जैसी बीमारी हो जाती है और हमारे द्वारा बिजली का बिल चुकता किया गया है जो आज तक ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया जो कि हमारे पास रसीद भी है

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