NH-34: रीवा-लखनादौन सड़क सरकार दे रही है किराए पर, ढाई करोड़ में हो रही है डील

NH-34: उत्तरप्रदेश(UP) को दक्षिण भारत में कन्याकुमारी(Kanyakumari) से जोड़ने वाली सड़क NH-34 के एक हिस्से को लीज(Rent) पर देने की तैयारी चल रही है भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(NHAI) नई सड़कों के निर्माण के लिए इस आय(Income) से धन एकत्र करेगा। मध्यप्रदेश में सबसे पहले 287 किमी रीवा-लखनऊ(Rewa-Lucknow) सड़क को सीमित अवधि के लिए निजी हाथों में सौंपा जाएगा। ये लीज 20 से 25 साल के लिए प्लान(Plan) की गई है। नई सड़कों का जाल बिछाने के लिए एनएचएआई(NHAI) अब सड़कों को निजी हाथों में देकर एकमुश्त पैसा वसूलने की कोशिश कर रहा है, ताकि और सड़कें बनाई जा सकें।

NH-34: सबसे पहले मध्य प्रदेश में 287 किमी रीवा-लखनऊ सड़क को सीमित अवधि के लिए निजी हाथों में दिया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस सड़क को करीब 2500 रुपए में किराए पर देना चाहता है। 2020 में यह सड़क करीब 4348 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुई थी।

इस तरह होगी प्रक्रिया-

NH-34: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 20-25 साल के लिए सड़क को निजी हाथों में सौंप देगा। क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय स्तर पर फंडिंग(Funding) के आधार पर डेडलाइन(Deadline) तय की जाती है। इसके लिए टेंडर बुलाए जाएंगे। जो ज्यादा कीमत देगा उसे सड़क दी जाएगी। इस सड़क के रखरखाव और टोल(Tole) से होने वाली आय निजी कंपनी को दी जाएगी।

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टोल से 80 लाख की कमाई

NH-34: तब से यह सड़क बनकर तैयार हो गई है। रीवा और जबलपुर(Rewa And Jabalpur) के बीच चार टोल ब्लॉक हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से 34 के बीच आते हैं। पहला टोल अमरपाटन में, दूसरा मैहर में, तीसरा सिहोरा में और चौथा बरगी में पड़ता है। टोल के जरिए इस सड़क से प्रतिदिन 70-80 लाख रुपये की कमाई होती है। जब निजी कंपनी सड़क खरीदती है तो टोल से होने वाली पूरी कमाई कंपनी को चली जाती है। वर्तमान में, राष्ट्रीय सड़क प्राधिकरण टोल से राजस्व एकत्र करता है। एनएचएआई ने टोल वसूली के लिए एक एजेंसी नियुक्त की है जो एक निश्चित कमीशन लेती है।

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प्रक्रिया में कितना समय लगेगा?

NH-34: फिलहाल अधिकारी इस सड़क से होने वाले आय-व्यय(Income-Expense) का निर्धारण कर रहे हैं। इसके आधार पर टेंडर प्रोसेस किए जाएंगे। स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि यह प्रक्रिया अप्रैल 2023 तक पूरी हो जाएगी। टेंडर आमंत्रित करने के बाद निजी कंपनियों से प्रस्ताव मंगाए जाएंगे।

सड़क निर्माण मॉडल

टीओटी मॉडल – टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल (टीओटी) योजना के तहत, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, सड़क का निर्माण एनएचएआई द्वारा किया जाता है और बाद में रखरखाव की अवधि समाप्त होने के बाद, इसे किसी संस्था या संगठन को अनुबंधित किया जाता है। इसके बदले एकमुश्त रकम ली जाती है। इस अवधि के दौरान एजेंसी टोल के माध्यम से राजस्व एकत्र करती है।

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NH-34: पहले यह मॉडल था-

बीओटी – बिल्ड ऑन ऑपरेट ट्रांसफर – पहले एजेंसी द्वारा बनाया जाता है और फिर एक निर्दिष्ट अवधि के लिए टोल वसूला जाता है। निर्धारित अवधि के बाद सड़क सरकार के नियंत्रण में आ जाएगी।

एचएएम – हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल – सरकार और पार्टी या संगठन के बीच एक समझौता होगा 40 प्रतिशत सरकार द्वारा भुगतान किया जाएगा, जबकि शेष 60 प्रतिशत प्रारंभिक रूप से एजेंसी द्वारा लगाया जाता है, जिसे सरकार अगले 15 वर्षों में किस्तों में चुकाती है। इस बीच, एजेंसी टोल से पैसा वसूल करती है।

ईपीसी – इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण – में सड़क बनाने वाला ठेकेदार शामिल है। इस निर्माण की पूरी राशि सरकार देती है। टोल एनएचएआई वसूल करेगा।

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NH-34: रीवा- लखनऊ मार्ग को टीओटी मॉडल में लाने की तैयारी चल रही है। यह एनएचएआई के उच्च स्तर पर किया जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने पर टेंडर जारी किया जाएगा। एनएचएआई देश की जनता से फंड इकट्ठा कर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर फोकस कर रहा है। इस योजना के तहत राज्य के कुछ राज्यों में सड़कें उपलब्ध कराई गई हैं। –सुमेश बंजल, निदेशक एनएचएआई

Article By Sunil

 

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