एक तहसीलदार के वेतन मे दो लोगों को काम मिलेगा …

मानो या ना मानो

यदि खाने वाले ज्यादा हो और रोटियां कम हो तब आप क्या करेंगे ?
जाहिर कि सभी लोगो के बीच रोटियों का बंटवारा कर दिया जायेगा ताकि सभी को खाने के लिये थोड़ा थोड़ा ही सही मगर मिल तो जायेगा…।

फिलहाल देश मे रोजगार की भी यही स्थिति है काम की कमी है जबकि करने वालों की संख्या अधिक है

ऐसे मे क्यों ना हम रोटी की तरह रोजी का भी आपस मे बंटवारा कर लें ?

मसलन एक पुलिस कर्मी बारह घंटे की नौकरी करता है और पचास हजार रूपये मासिक वेतन पाता है

अब यदि उसकी बारह घंटे की नौकरी को छः घंटे करके शेष बचे छः घंटे की नौकरी किसी एक और जरूरत मंद को दे दी जाये और पचास हजार के बेतन को दो लोगो के बीच बराबर बराबर बांट दिया जाये तो कैसा रहेगा …

मेरा मानना है कि रोजगार के क्षेत्रो मे ज्यादा से ज्यादा लोगो की हिस्सेदारी के लिये ना केवल प्रति व्यक्ति के काम के घंटो मे कटौति किये जाने की जरूरत है बल्कि साथ ही साथ वेतन की मोटी रकम को भी दो लोगो मे समायोजित किये जाने की आवश्यकता है ।

उदाहरण के तौर पर अभी एक तहसीलदार साहब को आठ घंटे की नौकरी के ऐवज मे सत्तर से अस्सी हजार रूपये का वेतन मिल रहा है इस पद के लिये छः छः घंटे के लिये दो लोगो को रखा जा सकता है और बतौर बेतन दोनो को चालिस चालिस हजार रूपये दिये जा सकते है

इस तरह रोजगार के क्षेत्रो का विकेंद्रीकरण करके काफी हद तक हम रोजगार की समस्या का समाधान तलाश सकते है ..

क्योंकि रोजगार के क्षेत्रों का जब तक विकेंद्रीकरण नहीं होगा तब तक इस देश मे जनसामान्य के लिये रोजगार भी सुलभ और आसान नहीं होगा ,

कारण. अभी कुछ लोगों के पास सौ तरह के काम है तो उधर हजारों लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई काम नहीं है ,
अलावा इसके रोजगार की दृष्टि से अधिक सुरक्षित कारोबार के क्षेत्र मे अभी कुछ लोगों का ही एकाधिकार है ।

उदाहरण के तौर पर पेट्रोलियम कारोबार को ही ले लीजिये , अभी एक आदमी लाखों लीटर डीजल पैट्रोल अकेले बेच रहा है अब यदि सौ लोगों का समूह यही काम करें तो कम से कम इतने लोगों के लिये रोजगार की व्यवस्था तो हो ही जायेगी ,

यही स्थित घरेलू गैस वितरण की भी है , खनिज कारोबार मे भी गिनती के लोग ही मलाई मार रहे है
दरअसल सरकार जब तक रोजगार के बड़े क्षेत्रों मे बेरोजगारो की भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेगी तब तक इस समस्या का संतोषजनक समाधान नही निकलेगा

अतःआने वाले दिनो मे हमे
ना केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये इंतजाम करने होंगे बल्कि साथ ही अनिवार्य रूप से रोजगार के उन क्षेत्रो का विकेंद्रीकरण भी करना होगा जिनपर अभी मुठ्ठी भर लोगो का कब्जा है

फिलहाल कोरोना संक्रमण के चलते 12 लाख प्रवासी मजदूरो की वापसी के बाद उनके लिये समुचित रोजगार की व्यवस्था कर पाना किसी भी सरकार के लिये आसान काम नही होगा

लेकिन यह नामुमकिन भी नही है सरकार चाहे तो रोजगार के क्षेत्रो का विकेंद्रीकरण करके श्रमिको के लिये रोजी रोटी का इंतजाम कर सकती है ।

मगर सवाल यह उठता है कि क्या गरीब जनता के अमीर नेता ऐसा होने देंगे ?

दर असल अभी रोजगार के कई हल्को मे कुछ लोगो का ही कब्जा है या फिर यह कहें कि कुछ लोगों के पास सैकड़ो काम है तो सैकड़ो लोग ऐसे भी है जिनके पास कोई काम नही है काम का यही असमान बंटवारा देश मे बढती बेरोजगारी की असली वजह है
जबकि कमाई और काम के लिहाज अनेक ऐसे क्षेत्र है जहां से हजारो श्रमिक परिवारो की रोजी रोटी मिल सकती है ।

मगर क्या गरीब जनता के अमीर नेता कभी ऐसा होने देंगे ….आगे पी एम जाने

डेस्क रिपोर्ट

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