घूंस माफिया का सरगना कौन ?

ashok jiचूंकि राजनीति का सबसे बड़ा आकर्षण करप्शन है इसलिये किसी भी सरकार से यह उम्मीद ना करें कि वह करप्शन के खिलाफ ठोस कदम उठायेगी जाहिर है कि जिस दिन से राजनीति मे करप्शन खत्म हो जायेगा उस दिन से कोई भी समझदार व्यक्ति राजनीति करने नही जायेगा बहरहाल सूबे मे घूंस माफिया के आतंक को उजागर करने वाली दो खबरों पर गौर फरमाईये

पहली खबर रीवा की है जहां चैक पोस्टों पर चल रही अवैध वसूली के खिलाफ लोगों ने प्रभारी मंत्री विसाहुलाल सिंह से मुलाकात कर इसे खत्म कराने की मांग की है फौरी तौर पर रीवा जिले के प्रभारी मंत्री ने लोगों को आश्वस्त तो किया है कि वे इस दिशा मे जरूरी कदम उठायेंगे मगर कुछ करेंगे इसको लेकर संदेह है

दूसरी खबर नगर पालिक निगम सतना की है जिसमे भवन अनुज्ञा के लिये घूंस वसूले जाने की जानकारी है हालांकि इस खबर मे यह नही बताया गया है कि भवन अनुज्ञा मे लगने वाली घूंस को खत्म करने के लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये

मालुम हो कि कभी कमलनाथ पर भोपाल के बल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्ड बना लेने का आरोप लगाने वाले शिवराज मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही भ्रष्टाचार के मामले मे खामोश हो गयें थे

उनके रुख से यह साफ है कि वे घूंस माफिया के खिलाफ नही है …

यहां यह बतलाते चलें कि मध्यप्रदेश के सभी जिलों मे घूंस माफिया का दबदबा है और सभी जिलों मे घूंस माफिया के सरगना विठाये गये है जिन्हे नियम कायदो के पालन मे जनता से कालर पकड़कर घूंस वसूलने के अधिकार दिये गये है ती …. आगे सी एम जाने

डेस्क रिपोर्ट

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