शिवराज सिंह चौहान लड़ रहे है उपचुनाव, बगावत करने वाले समझ ले

शिवराज सिंह चौहान लड़ रहे है उपचुनाव, बगावत करने वाले समझ ले, प्रतिमा बागरी तो प्रतीक मात्र भर है यानि जो कोई भी विरोध करेगा बाद मे सलामत नही बचेगा ...

 

Raigaon by-election
Raigaon by-election

रैगांव मे चुनाव प्रचार का श्री गणेश करते हुये सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिमा बागरी के विरोध मे पर्चा दाखिल करने वालो को साफ साफ चेता दिया है कल उन्होने रैगांव मे आयोजित पार्टी के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन मे कहा कि…चुनाव तो वे लड़ रहे है प्रतिमा बागरी तो प्रतीक मात्र भर है यानि जो कोई भी विरोध करेगा बाद मे सलामत नही बचेगा …

फिलहाल अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उम्मीदो पर पानी फेरकर गैरों के सहारे खड़ी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौति पार्टी के अपने उन नेताओं को समझाने और बुझाने की है जिनके राजनैतिक भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है

क्योंकि कभी ग्वालियर संभाग की सोलह सीटों के अलावा बाकि की अन्य सीटो पर होने वाले उपचुनाव मे बीजेपी ने उन सब को उम्मीदवार बना दिया था जो सिंधिया के साथ कांग्रेस छोडकर बीजेपी मे शामिल हुये थे ।

जबकि यह वही लोग थे जिन्होने 2018 के चुनाव मे बीजेपी के प्रत्याशियों को हराने का कीर्तिमान रचा था अब जहां जहां ऐसे लोगो को चुनाव लड़ने का मौका मिला वहां के खाटी भाजपाई हाशिये पर चले

बहरहाल इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब बाहर के नेताओं को बीजेपी ने अपनी गोद मे विठाया तब तब पार्टी ने अपने ही किसी कार्यकर्ता को गर्त मे ढकेलने का काम किया है

बहरहाल इस तरह के मामलो के लिये विंध्य विख्यात है

कभी विंध्यप्रदेश समाजवादियों का गढ था लेकिन बाद मे यहां कांग्रेसियों का दबदबा कायम हो गया जबकि जनसंघ का राजनैतिक दीया कभी टिमटिमाता तो कभी कांग्रेस की आंधी मे बुझ जाता

यह स्थिति तब तक बनी रही जब तक कि बीजेपी को दूसरे दलों के नेताओं का साथ नही मिला लेकिन जहाँ दूसरी पार्टियों के नेताओं के आने से बीजेपी मजबूत हुई वहीं बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की राजनैतिक पहिचान खत्म होती गई

रीवा मे नागेंद्र सिंह (गुढ) मैहर मे नारायण त्रिपाठी अमरपाटन मे रामखिलावन और सतना मे गणेश सिंह की वजह से ना जाने कितने ही भाजपाईयों का राजनैतिक भविष्य अंधकार मय हो गया

नारायण त्रिपाठी पूर्व कांग्रेसी की वजह मैहर मे मोतीलाल तिवारी की कोई राजनैतिक हैसियत नही रही जबकि इसी तरह से हर्ष सिंह की वजह से रामपुर मे प्रभाकर सिंह की भी कोई एहमियत नही बची है सतना मे गणेश सिंह की वजह और अमरपाटन मे रामखिलावन पटेल के कारण तमाम खानदानी जनसंघियो का राजनैतिक कैरियर चौपट हो गया है कहने का तात्पर्य यह है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की सियासी जमीन पर वे लोग काविज हो ते चले गये है जो कभी बीजेपी की जड़ों मे मठ्ठा डालने का काम करते थे

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फिलहाल रैगांव उपचुनाव मे बीजेपी की महिला उम्मीदवार का परिवार भी कभी कांग्रेस का झंबाबरदार रहा है अब देखना यह है कि अपनी सियासी जमीन बचाने के लिये पुष्पराज बागरी उपचुनावो मे क्या रुख अपनाते है….

डेस्क रिपोर्ट

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