पंचर बनाने वाले का बेटा,दूसरी बार बना “आप” का विधायक

दो बार विधायक बनने के बाद भी प्रवीण कुमार के पिता अब अभी भी पंक्चर की दुकान चलाते हैं और उससे होने वाली कमाई से ही अपने घर का खर्च चलाते हैं,मौजूदा वक्त में यह बात तो थोड़ी हैरान करने वाली जरूर है लेकिन सौ फिसीदी सच है।


प्रवीण कुमार मूल रुप से भोपाल के रहने वाले हैं। प्रवीण ने भोपाल में गोविंदपुरा के आइडियल स्कूल से पढ़ाई की। मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर भोपाल के टीआईटी कॉलेज से एमबीए किया। भोपाल में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली नौकरी की खोज में चल दिए। दिल्ली की एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में करीब 50 हजार रुपये महीने की नौकरी मिल गई। जहां उन्होंने नौकरी ज्वॉइन की और आराम से जिंदगी गुजराने लगे।

फिर साल 2011 आया और उनकी लाइफ ने एक और करवट ली। अन्ना हज़ारे के जनलोकपाल आंदोलन से वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनके पिता पीएन देशमुख जो भोपाल में ही एक पंक्चर की दुकान चलाते हैं, वे इस फैसले से खुश नहीं थे क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति कुछ खास ठीक नहीं थी। ऐसे में बेटे का एक अच्छी नौकरी छोड़ आंदोलन में जाने के फैसले से पिता काफी नाराज हुए थे। लेकिन बाद में सब कुछ नॉर्मल हो गया।

अप्रैल 2011 से लेकर अगस्त 2011 तक आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।आंदोलन के बाद जब अरविन्द केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई तो प्रवीण केजरीवाल के साथ हो गए। वह शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) भी रह चुके हैं। उन्होंने स्कूल दाखिलों में डोनेशन रोकने के लिए अहम कदम उठाए। साथ ही नर्सरी एडमिशन में डोनेशन रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर लॉन्च करने में भी उनकी अहम भूमिका रही।

दिल्ली चुनाव 2020 में जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से सरदार इमप्रीत सिंह बख्शी, आम आदमी पार्टी से प्रवीण कुमार चुनावी मैदान में थे। वहीं कांग्रेस की ओर से तलविंदर सिंह मारवाह अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे थे। लेकिन प्रवीण कुमार ने बीजेपी के इमप्रीत सिंह को 16,063 मतों के अंतर से हराया है। साल 2015 में प्रवीण कुमार ने बीजेपी उम्मीदवार मनिंदर सिंह धीर को 20,450 मतों से पराजित किया था। प्रणीव कुमार को जहां 43,927 वोट मिले थे, वहीं बीजेपी उम्मीदवार मनिंदर सिंह धीर को 23,477 वोट मिले।

अयोग्य घोषित किए गए विधायक में प्रवीण का भी नाम था 

आज जिस मुकाम पर प्रवीण कुमार हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उनकी राहें आसान नहीं थीं। साल 2015 में इनकी विधायकी खतरे में थी, जब आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों के ऊपर ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ का केस दर्ज हुआ। क्योंकि उन 20 विधायकों में अलका लांबा के अलावा उनका भी नाम था। दरअसल, मई 2015 में केजरीवाल सरकार ने अपने मंत्रियों के लिए विधायकों को ही संसदीय सचिव के पद पर तैनात कर दिया।

फिर इस फैसले से विपक्ष में बैठी भाजपा और कांग्रेस ने विरोध किया और प्रशांत पटेल नाम के एक शख्स ने राष्ट्रपति के पास याचिका दायर कर दी। इस याचिका में कहा गया कि AAP के लगभग 21 विधायक ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ पद पर हैं। इसलिए उनकी सदस्या रद्द होनी चाहिए।

कोर्ट में चुनाव आयोग और विधायकों ने इस मामले में 28 फरवरी 2018 को अपनी बहस पूरी की थी। चुनाव आयोग ने 20 जनवरी 2018 को आप के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने 23 मार्च को चुनाव आयोग के आदेश को रद्द कर दिया था। 5 नवंबर साल 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ से बड़ी राहत मिली। इस मामले में विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से सलाह लेने के बाद यह फैसला लिया। जिसके बाद ही ये विधायक दोबारा चुनाव लड़ सके हैं।

पिता ने कहा लोगों का भरोसा कभी मत तोड़ना।

प्रवीण कुमार भले ही दूसरी बार विधायक चुन लिए गए हैं, लेकिन उनके पिता ने अपनी पंचर की दुकान आज तक बंद नहीं की है। उनके मुताबिक इसी की कमाई से उन्होंने अपने बेटे को एक काबिल इंसान बनाया है, जो आज विधायक बनकर जनता की सेवा कर रहा है। भोपाल के जिंसी चौराहे के समीप बोगदा पुल के पास प्रवीण के पिता की ज्योति टायर वर्क्स के नाम से जो दुकान है, आज भी प्रवीण कुमार के पिता वहां रोज जाते हैं और पंचर बनाने का काम करते हैं।

प्रवीण के पिता देशमुख

प्रवीण के पिता देशमुख और माँ उर्मिला बेटे के चुनाव प्रचार के लिए महीने भर पहले से दिल्ली में ही थे। भाई लोकेश और भाभी नीलिमा भी चुनाव प्रचार में प्रवीण का साथ देने के लिए दिल्ली आए थे। प्रवीण के पिता ने कहा था कि इस जीत के बाद हम सभी अगले ही दिन भोपाल चले जाएंगे। पिता का कहना है कि-

बेटा जब पहली बार विधायक बना तो भी हमने उसे यही सबक दिया कि तुम्हें यह मुकाम ईमानदारी के कारण मिला है। ईमानदारी को मत छोड़ना। इसी का नतीजा है कि जंगपुरा के लोगों ने दूसरी बार उस पर भरोसा जताया। मैंने बेटे से हमेशा यही कहा कि लोगों ने जिस वजह से तुम पर भरोसा जताया है, उनके भरोसे को कभी मत तोड़ना।

ABDUL RASHID

स्वतंत्र पत्रकार,लेखक व स्तंभकार [email protected]

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