दुबे को तो मरना ही था ! बस मारकर मरा

आलेख, कमलेश चौबे वरिष्ठ पत्रकार अनादी टीवी भोपाल

विकास दुबे घनघोर अपराधी था उसका यही हश्र होना था लेकिन इससे भी कोई इनकार नहीं कर सकता कि वो इसलिए भी मारा गया कि उसके नाम के आगे ‘दुबे’ लिखा था। अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ उसे कैसे छोड़ देता। कुछ लोगों को ये बात बुरी लगेगी लेकिन क्या वो इससे इनकार करेंगे कि योगी ब्राह्मणवाद के विरोध की उपज ही हैं। योगी गोरखपुर के गोरक्षपीठ के महंत हैं जहां कई दशकों से योगी के ‘मठ’और ‘हाता’ यानि कि हरिशंकर तिवारी एंड एसोसिएट्स के खिलाफ जंग चल रही है या ये कहें कि ब्राह्मणों और ठाकुरों के बीच की वर्चस्व की जंग।

अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ
अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ

ये जंग तब शुरू हुई जब योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ के गुरु दिग्विजयनाथ ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति आईएएस अफसर सूरतमणिराम त्रिपाठी का अपमान कर दिया और यूनिवर्सिटी के एक दबंग छात्र हरिशंकर तिवारी ने इसका बदला लेते हुए दिग्विजयनाथ का। इसके बाद हरिशंकर तिवारी को मारने की कोशिश हुई तो वो उसने मरता क्या न करता हथियार उठा लिए और जंग शुरू हो गई।

इस जंग में अजीत सिंह, बलवंत सिंह, रवींद्र सिंह, मृत्युंजय तिवारी, वीरेंद्र शाही जैसे पता नहीं कितने लोग मारे गए। चूंकि मठ को पॉलिटिकल पावर मिला था हरिशंकर भी 9 हत्यायों के आरोप के बाद जेल से चुनाव में उतरे और बीस साल लगातार तक मंत्री रहे। सरकार किसी की भी हो और बाहुबल में मठ पर भारी ही रहे। यही नहीं यूपी में अपराधिकरण का बहुत हद तक उन्हें जिम्मेदार माना जाता है और वो बाहुबलियों के पितामह माने जाते हैं।गैंगस्टर एक्ट बना ही हरिशंकर तिवारी के लिए था। श्रीप्रकाश तिवारी जैसे अपराधी तिवारी ने ही पैदा किये (देखें रंगबाज़ वेब सीरीज) आज हरिशंकर तिवारी अपने ही एक चेले से दो चुनाव हार घर बैठे हैं हालांकि उनका एक बेटा अभी भी विधायक है, एक सांसद रह चुका जबकि भांजा विधान परिषद का अध्यक्ष रह चुका है

गोरक्षपीठ
गोरक्षपीठ

वहीं योगी सीएम हैं योगी ने सीएम बनते ही सबसे पहले हरिशंकर तिवारी से बदला लेने की कोशिश की। तिवारी के घर मे पुलिस घुसेड़ दी। ये कहकर कि उनके घर मे कुछ वांटेड अपराधी छिपे हैं लेकिन जल्दबाजी में योगी और उनकी पुलिस से चूक हो गयी। जिन अपराधियों को पकड़ने के लिए तिवारी के किलेनुमा घर में छापा डाला गया उनमें कई पहले से जेल में बंद थे। इसका खुलासा हुआ तो गोरखपुर में तिवारी के समर्थक सड़क पर उतर पड़े और ‘बम बम शंकर’जय हरिशंकर के साथ योगी नहीं शिखण्डी है के नारे गूंज उठे।

आरोप लगे कि योगी सीएम बनते ही अपने ब्राह्मणद्रोह को प्रकट करने लगे हैं। यही आरोप अब योगी पर कानपुर मुठभेड़ कांड के बाद लग रहे हैं। इसमे कोई शक नही कि विकास दुबे एक दरिंदा था। लेकिन उससे भी कई बड़े दरिंदे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और उनकी धौंस बरकरार है वो ‘दुबे’ था इसलिए योगी की पुलिस के निशाने पर था। पुलिस ने बहुत पहले उसका डेथ वारंट निकाल दिया था। मौके की तलाश में थी और ये उसके रिश्तेदार ने ही दे दिया। पारिवारिक जमीन के विवाद में उसके खिलाफ रिपोर्ट आई तो पुलिस ने फटफट स्क्रिप्ट तैयार की कि वो उसे पकड़ने जाएगी, वो फायरिंग कर भागने की कोशिश करेगा और जवाबी कार्यवाई में मारा जाएगा। लेकिन ये पता विकास को भी था कि पुलिस ने उसे मारने की पटकथा पहले से ही तैयार कर रखी है और मुठभेड़ असली हो गयी। पुलिस विकास को तो नहीं मार पाई आठ पुलिस वाले जरूर ढेर हो गए। इसके बाद तो विकास को मरना ही था। उसका डेथ वारंट पहले से बना था। तामीली पर उसने अपने हाथ से मोहर लगा दी। हा अकेले मरने की जगह वो अपने कुनबे के पांच और लोगों को साथ ले गया और कई और जाएंगे।

डेस्क रिपोर्ट

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