कल रात बापू सपने में आये थे…. गांधी जयंती विशेष

कल रात सपने मे बापू आये थे , काफी नाराज दिख रहे थे ,
मैंने डरते – डरते बापू से पूछा , सब खैरियत तो है ना बापू ?

यह सुनते ही बापू भड़क गये –
और कहने लगे कि
क्या खाक खैरियत है ….
चारों तरफ भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अत्याचार है
क्या इन्हीं सब चीजों के लिये मैंने आजादी के लिये लडाई लड़ी थी ?
इतना कहकर बापू खिड़की के पास जाकर खड़े हो गये
शायद वे बाहर चारों तरफ फैली गंदगी को निहार रहे थे ,
तभी मैंने धीरे से कहा …..
बापू …
देश बदल रहा , आगे बढ रहा , सब कुछ ठीक ही तो चल रहा है ,
यह सुनते ही बापू एक बार पुनः गुस्से से फट पड़े ,
क्या ठीक चल रहा है ,
एक तरफ गरीब आदमी महंगाई , बीमारी और बेरोजगारी से मर रहा है और दूसरी तरफ देश का नेता ऐश कर रहा है , क्या देश सिर्फ नेताओं के लिये ही आजाद हुआ था ?

बड़ी ही विकट स्थिति थी
बापू का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था ,
और मेरी समझ मे कुछ नहीं आ रहा था कि आखिर उन्हें किस तरह से शांत किया जाये ,
अतः मैंने टापिक बदलने की गरज से बापू से कहा –
बापू पानी पियेंगे ?

बापू ने धीरे से कहा , ले आओ
मैंने झट से फ्रिज खोला और पानी की एक बोतल निकालकर बापू की तरफ बढ़ा दी
बोतल हाथ मे लेते हुये बापू ने पूछा , यह क्या है ?
मैंने कहा , बापू यह विस्लरी है , एक दम शुद्ध पानी है , बे हिचक पी लीजिए ,
बापू ने पानी की बोतल वहीं पास रखी टेविल पर रख दी , और कहने लगे कि कुयें अथवा नदी का जल हो तो ले आओ , मैने बोतल का पानी कभी नहीं पिया है ।
मैंने डरते डरते बापू से कहा
कि नदियां प्रदूषित हो गई है और कुयें सूख गये है , लिहाजा अब हम लोग बोतल मे बंद इसी तरह का शुद्ध पानी पी रहे है ,
असल मे यह इक्कीसवीं सदी का अमृत है बापू ,
पी लीजिए

यह सुनते ही बापू रूंआसे हो गये ,
कुछ देर तक कमरे मे खामोशी छाई रही ,
उधर सुबह होने वाली थी , मुझे गांधी जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम मे भी जाना था ,
अतः
मैंने बापू से कहा , बापू आप थोड़ा विश्राम कर लीजिये ,
मुझे कहीं जाना है ।
यह सुनकर
बापू ने डबडबाई हुई आंखों को साफ किया और राम का नाम जपते हुये बाहर की ओर चल पड़े ,
मैंने दूर जाते हुये बापू से पूछा , बापू अब दुबारा आप कब आयेंगे ?
रोते हुये बापू ने कहा – अब कभी नहीं – – –

मैने धीरे से कहा अलविदा बापू
क्योकि
वैसे भी अब आप जैसे लोगों की जरूरत ही क्या है आखिर देश तो आजाद हो ही चुका है और नेताओं के दम पर जैसे तैसे चल भी रहा है ….

डेस्क रिपोर्ट

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