सरकार का मानना है कि महंगाई कम हुई तो आदमी महंगे हो जायेंगे

मानो या ना मानो ……. विजली भले ही महंगी हुई हो लेकिन आमआदमी तो सस्ता हुआ है ना … वैसे भी दुनिया विजली से नहीं बल्कि हमारे आप जैसे आदमियों से चल रही है, इसलिये यदि जरूरत की चीजें सस्ती हों जायेंगी तो आदमी महंगा हो जायेगा और तब उसे एक रूपये किलो गेहूं और दो रूपये किलो चावल देकर खरीद पाना आसान नहीं होगा, जाहिर है कि सस्ते आदमी के महत्व को जानने समझने के बाद से ही सरकारों ने महंगाई पर काबू पाने का इरादा छोड़ दिया था …

कहते हैं कि आदमियों को सस्ता करने की शुरूआत अंग्रेजो के जमाने से ही हो गई थी बाद मे 1971 मे इंदिरा जी ने बैंको का राष्ट्रीय करण करके व राजाओं के प्रीवीपर्स को समाप्त करके अमीरों को गरीबों की बराबरी मे लाकर खड़ा करने की कोशिश की थी खैर हाल के वर्षों में आम आदमी लगातार सस्ता होता चला गया है वैसे भी जब कभी भी पेट्रोल की कीमते बढती है आम आदमी की कीमत घट जाती है

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2016 मोदी सरकार ने भी नोटबंदी करके बड़े धन्ना सेठो को सस्ता करने का प्रयास किया था तब आम आदमी जो महंगाई की मार से मरा हु था वह बड़े आदमियों की गिरती हुई कीमतों से बेहद खुश था देश के सस्ते लोगो ने मोदी सरकार के इस फैसले की खूब तारीफ की थी 2017 मे मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भी इसी एजेण्डे को आगे बढाने मे जुटी हुई थी इसलिये जहाँ एक तरफ वह पेट्रोल और रिश्वत की दरों मे लगातर वृद्धि करती चली जा रही थी वहीं सरकार सस्ते लोगों को एक रूपया किलो गेहूं और दो रुपये किलो चावल देकर आसानी से उन्हे खरीदने के एजेंडें पर काम कर रही थी

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दरअसल मनमाने तरीके से लोकतंत्र तभी चल पायेगा जब लोग सस्ते हो जायेंगे सरकारों का मानना है कि खैरात की खुराक पर जिंदा रहने वाले कभी सुशासन को लेकर बगावत नही करते है कहते हैं कि पुरानी शिवराज सरकार की आओ बनाये मध्यप्रदेश अभियान का लोगो ने गलत मतलब निकाल लिया था नेता मंत्री और संतरी आओ खायें मध्यप्रदेश जैसी मुहीम चलाने मे जुट गये थे हालांकि व्यापक तौर पर खैरात की खुराक बांटने के बावजूद चरम स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रशासन के अहंकारी रवैये के कारण 2018 के विधानसभा के चुनाव मे बीजेपी बहुमत हासिल करने से चूक गई थी

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राजनैतिक पंडितों के मुताबिक शिवराज सरकार के दौरान उपजी प्रशासनिक आरजकता के चलते जनता मे खासी नाराजगी थी नतीजतन शंकर लाल तिवारी जैसे गरीब फक्कड़ और ईमानदार नेता भी चुनाव हार गये

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बहरहाल मनमाने तरीके से लोकतंत्र तभी चल सकता है जब लोग सस्ते होगे इसलिये सबसे पहले सरकारें भरी जेब वालो की जेब कतरकर उनका वजन कम करना चाहेंगी और बाद मे सरकार अंत्योदय जैसे कार्यक्रम से लोगो को जोड़ने का अभियान चलायेंगी फिलहाल कोरोना संक्रमण की वजह से आम आदमी बड़ी तेजी से सस्ते हो रहें है माना यह जा रहा है कि अगले कुछ वर्षों मे ज्याद से ज्यादा लोग सस्ते होकर समाज के अंतिम पंक्ति मे खड़े मिलेंगे और तब उनके लिये दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानव वाद के लक्ष्य को हासिल कर पाना आसान होगा

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डेस्क रिपोर्ट

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