विकास दुबे मर गया – भ्रष्ट तंत्र बच गया ….

त्वरित टिप्पणी अशोक शुक्ला “चौकन्ना” वरिष्ठ पत्रकार

मौत से बचने के लिये ही वह कल उज्जैन मे गिरफ्तार हुआ था शायद उसे इस बात का भरोसा था कि सैरेंडर कर देने के बाद वह बचा रहेगा मगर आज वह मारा गया ….. मध्यप्रदेश पुलिस की कथित सफलता और सिस्टम की बड़ी विफलता के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर विकास दुबे ने आसानी से पकडे़ जाने के बाद पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश क्यों की ?आठ पुलिस कर्मियो की हत्या के लिये जिम्मेदार उत्तरप्रदेश के कानपुर का दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को कल मध्यप्रदेश के उज्जैन मे बड़ी आसानी से पकड़ लिया गया था यद्यपि उसकी आसान गिरफ्तारी की वजह से राजनैतिक तंत्र की भूमिका सवालों के घेरे मे थी ।

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद यह माना जा रहा था कि अब पुलिस और सियासत के वो तमाम चेहरे बेनकाब हो जायेंगे जो विकास दुबे की मदद मे लगे हुये थे परंतु सफेदपोश गुनहगारो के चेहरो से पर्दा उठ पाता इससे पहले ही सभ्य समाज का नासूर दुर्दान्त अपराधी दुनिया से ही उठ गया … कहा जाता है कि आज सुबह दुर्घटनाग्रस्त स्कार्पियो वाहन की खिड़की से निकलकर विकास दुबे ने एस टी एफ की पकड से भागने की कोशिश की थी मामले की विवेचना कर रहे पुलिस के इंस्पेक्टर की सर्विस रिवाल्वर भी उसने छीन ली थी भागते हुये विकास दुबे ने फायर भी किया था बाद मे एस टी एफ टीम की गोली से मारा गया

कल उज्जैन मे पुलिस के एक थप्पड़ से खामोश हो जाने वाला लंगड़ा विकास दुबे चार चार पुलिस कर्मियों के बीच से भागने का प्रयास करेगा इस बात पर सहज ही यकीन तो नही होता है …लेकिन जिन्हे मारने का परमिट मिला हो उनकी बात मान लेने मे ही आपकी भलाई है क्योकि आपके पास इसके अलावा कोई दूसरा चारा भी तो नही है । बहरहाल विकास दुबे जैसे लोग मारें जायें यह तो अच्छी बात है परंतु उसके  सियासी मददगार मित्र बचे रहे यह बहुत ही बुरी बात है ….आगे योगी जी जाने

डेस्क रिपोर्ट

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