राहुल गांधी के आगे आते ही कांग्रेस ढेर हो जाती

पार्टी छोड़कर जा रहे लोगो की वजह से परेशान होकर सोनियागांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के पद से स्तीफा देने का मन बनाया होगा मगर उन्हे क्या पता था कि नये अध्यक्ष के चयन को लेकर इतना बड़ा बवाल हो जायेगा कि सम्हालना मुश्किल पड़ जायेगा बहरहाल कल लड़खड़ाने के बाद जैसे तैसे कांग्रेस सम्हल ग ई और पार्टी के भीतर शांति की बहाली भी हो गई मगर क्या पार्टी का यह आंतरिक विरोध लंबे समय तक के लिये टल गया है या फिर 1969 की आंतरिक कलह की भांति ताजा विवाद पार्टी को विभाजन की ओर ले जायेगा ?

मालुम हो कि 1967 के लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के बाद ही पार्टी के बुजुर्ग नेता इंदिरा जी के विरोध मे लामबंद होने लगे थे 1969 मे तो बकायदा इंदिरा जी को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया गया था हालांकि तब बुजुर्ग नेताओं के सिंडीकेट को चुनौती देते हुये इंदिरा जी ने कांग्रेस (आर ) बनाई थी और खुद को इस तरह स्थापित कर लिया था जैसे की आज मोदी जी है

हालांकि 1975 के आपातकाल के बाद बहुत सारे नेताओं ने इंदिरा जी का साथ छोड़ दिया था लेकिन अपने चमत्कारिक व्यक्तित्व के कारण इंदिरा जी ने दुबारा वापसी की और इंदिरा कांग्रेस बनाकर उन्होने यह सावित कर दिया था कि वे अकेले अपने दम पर सरकार बनाने लायक बहुमत जुटा सकती है इधर. उनकी वापसी से मोरार जी देसाई जैसे दिग्गज नेता हासिये पर चले गये थे बाद मे 1984 मे इंदिरा जी की शहादत के बाद राजीव गांधी ने पार्टी की कमान सम्हाली मगर वे साफ सुथरी छवि के बावजूद 1989 मे पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिला पाने मे नाकाम रहे

बोफोर्स के आरोपों से घिरी राजीव गांधी की कांग्रेस व्ही पी सिंह का मुकाबला नही कर पाई थी यद्यपि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू किये जाने और आडवाणी जी की रथ यात्रा के रोके जाने से नाराज होकर बीजेपी ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद फिर से एक बार राजीव गांधी के नेतृत्व मे कांग्रेस सत्ता के संघर्ष मे जा खड़ी हु ई थी परंतु इसी दौरान कांग्रेस का सबसे बड़ा सितारा एक आतंकी घटना का शिकार हो गया और तब भी पार्टी मे नेतृत्व को लेकर एक अलग तरह का विवाद शुरू हो गया था

लेकिन अर्जुन सिंह और शरद पवार जैसे नेताओं के बीच भारी कश्मकश के बावजूद नरसिम्हा राव की अगुवाई मे कांग्रेस की सरकार बन ग ई थी और मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बना दिया गया था आगे 1996 मे सीताराम केसरी की अध्यक्षी मेऔर प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की अगुवाई मे कांग्रेस चुनाव लड़ती है लेकिन 1996 मे पार्टी की अनतर्कलह उसे ले डूबी कारण यह था कि हवाला कांड के कारण कुछ लोग पार्टी से अलग होकर चुनाव लड़ रहे थे

बहरहाल आगे राम मंदिर और अटल जी के चमत्कारिक नेतृत्व के कारण देश मे एन डी ए की सरकार बनती है और क ई बार की उठा पटक के बाद अटल जी के नेतृत्व मे बनी एन डी ए की सरकार 2004 तक चलती है जबकि उधर कांग्रेस विदेशी मूल के मुद्दे की परवाह किये बगैर सोनिया गांधी के नेतृत्व मे चुनाव लड़कर कामयावी हासिल कर लेती है और फिर दस सालों तक वह देश मे राज करती है लेकिन जैसे ही राहुल गांधी को आगे बढाने की कोशिश होती है कांग्रेस ढेर हो जाती है ……

डेस्क रिपोर्ट

ख़बरें पूरे विंध्य की http://satnanews.net/

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button