राजनीत में लातोपचार और प्रमोशन

समय चक्र मे समय की लात का खासा महत्व है लिहाजा जब कभी समय की लात किसी को पीछे पीछे से पड़ती है तो वह आदमी तेजी से आगे आ जाता है ठीक शिवराज जी की तरह …. और जब कभी यही समय की लात किसी को आगे से घलती तो वह आदमी एक दम से पीछे चला जाता है विल्कुल कमलनाथ जी की तरह

परंतु जब जब यही लात थोड़े थोडे से अंतराल मे किसी को आगे पीछे से पड़ती रहती है तब इंसान वहीं का वहीं रह जाता है ठीक कैलाश विजय वर्गीय जी की तरह यानि कि पल मे तोला और पल मे माशा …

बहरहाल राजनीति मे किसी भी शख्स के उत्थान और पतन मे समय की लात का विशेष महत्व रहता है अतः जो लोग इसके महत्व से वाकिफ है वे समय की एक अनुकुल चमत्कारी लात का धैर्यपूर्वक इंतजार करते रहते है ,

विल्कुल उसी तरह से जैसे कि कभी शिवराज जी ने राधौगढ से चुनाव हार जाने के बाद किया था और जैसा कि उन्होने 2018 मे सत्ता गवां देने के बाद किया था

लोग बतलाते है कि 2003 उमा जी के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद शिवराज ने समय की एक अनुकूल चमत्कारिक लात के लिये लंबी प्रतीक्षा की थी अंतोत्गत्वा समय की लात उन पर मेहरबान हुई और शीर्ष नेतृत्व की बदौलत 2006 मे उन्हे मध्यप्रदेश की कुर्सी मिल गई जबकि उमा जी के साथ इसके एकदम विपरीत हुआ
वे एक ही झटके मे सत्ता से कोसो दूर हो गई थी

राजनीति मे इस तरह के अनेको अनेक किस्से है 

फिलहाल सबकी नजरे मध्यप्रदेश विधानसभा के उपचुनावों पर टिकी हुई है अभी लोग यह नहीं समझ पा रहें है कि आखिर यहां समय की लात किसे कहां से पड़ेगी
दरअसल यहाँ शिवराज के साथ सिंधिया समर्थको राजनैतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है अब जिस किसी को समय की लात पीछे से पड़ेगी वह आगे आ जायेगा और जिस किसी को यह आगे से घलेगी वह पीछे चला जायेगा ठीक राहुल गांधी जी की तरह … आगे जनता जाने

डेस्क रिपोर्ट

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