यहां है चमगादडो का बसेरा, मित्र या शत्रु !

अगर कोरोना वायरस चमगादड़ से फैलता है तो विन्ध्य क्षेत्र रीवा-सतना के लिए बुरी खबर है ! यहां कई गांव की स्थिति भयावह हो सकती है ! सतना के एक गांव ऐसा है जहां हजारों चमगादड़ का बसेरा है, इसके चलते गांव में लोग खौफ के साये में जी रहे है। यह चमगादड़ कि बेहद खतरनाक प्रजाति है ? वाइल्ड लाइफ से जुडे जानकारों की माने तो चमगादड के कोरोना पाजटिव होने पर पूरा इलाका बीमार हो जायेगा !

ये है शहर से 25 किमी दूर रीवा-सतना की सीमा में स्थित बकिया गांव… गांव में संन्नाटा पसरा है लाॅक डाउन के साथ ही चमगादड़ों से यहां के लोग खौफजदा है। वजह यहां स्थित है वर्षो पुराना पीपल बरगद और आम का पेड। इस पेड में खतरनाक चमगादड़ों का बसेरा है। हजारो की तादात में चमगादड़ कई वर्षो से यहां रह रहे है। चमगादड़ो से पहले किसी को कोई खतरा नही था लेकिन जब से चमगादड़ों में कोरोना वायरस होने की खबर फेली है गांव में लोग दहशत में है। वाइल्ड लाइफ के जानकारों की माने तो ये चमगादड़ काफी खतरनाक प्रजाति के है इन्हे मैगा ब्राउन बैट कहा जाता है। वैज्ञानिको ने शोध में पाया है कि ये चमगादड अन्य चमगादड से काफी ज्यादा खतरानाक होते है। ये तेजी से काम करते है और यह संक्रमण व्यापक स्तर पर फेला सकते है। पूरा गांव इनकी चपेट में आ सकता है, पेड, हवा, पानी के साथ ही इनकी बीट से भी लोग संक्रमित हो सकते है।

यूं तो सैकडो वर्षो से यहां पर चमगादडो का बसेरा है एक किवदंती है कि इस जगह पर साधू संतो ने विशाल यज्ञ किया था। उसी दौरान ये चमगादड़ यहां पर आये। पहले लोग प्राचीन मंदिर में पूजा अर्चना करने आया करते थे लेकिन जब से कोरोना वायरस का वाहक चमगादड़ के होने की खबर लोगों को लगी है लोग डर गये है।

वैसे तो विन्ध्य क्षेत्र कोरोना वायरस से बचा हुआ है रीवा सीधी सतना सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिले में कोरोना पाजटिव नही मिला है। लेकिन यहां चमगादडों के बसेरा से प्रशासन इस पूरी तरह अनजान है। चमगादडों का झुंड पेड के आसपास पूरे दिन मडरात है और रात होते ही पेड से गायब हो जाते है। ऐसे में खतरा और भी बढ जाता है गांव के लोग चमगादडों खौफ में जीने को मजबूर हो जाते है।

संवाददाता नरेंद्र कुशवाहा

संवाददाता सतना न्यूज डॉट नेट

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