बिना स्कूल जाए क्यों दे बच्चे फ़ीस, क्या ठगे गए बच्चे

भोपाल : प्रदेश में इस समय लॉक डाउन और कोरोना वायरस की वजह से स्कूल बंद है लेकिन इस बीच प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से फीस का दबाव बनाया जाने लगा, दबाव की जानकारी सरकार तक पहुंची तो सरकार ने एक आदेश जारी कर यह कह दिया कि लॉक डाउन पीरियड के दौरान कोई भी स्कूल फीस ना लें, इस संबंध में अभी स्कूल शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया इस सर्कुलर में लिखा हुआ है कि कोई भी प्राइवेट स्कूल बच्चों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी प्रकार की फीस ना

सरकार के इस आदेश के बाद बच्चों के अभिभावक हैरत में हैं क्योंकि स्कूल फीस में ट्यूशन फीस ही एक बड़ा हिस्सा होता है जो कुल फीस का 80 से 90% होता है उदाहरण के लिए किसी एक विद्यालय जैसे कक्षा 10 के लिए ट्यूशन फीस कुल 24000 हजार 3 माह के लिए है यदि बच्चा बस से जाता है तो उसे 7000 हजार 3 माह के लिए अतिरिक्त और अगर वह मैस का उपयोग करता है तो 5000 3 माह के लिए अतिरिक्त लिए जाते हैं इसके अलावा वह कोई अन्य फीस नहीं ली जाती या भोजन और बस के उपयोग भोजन और बस का उपयोग नहीं है तो बची ट्यूशन फीस तो अगर पूरी ट्यूशन फीस ले ली जाएगी तो ऐसे में मुख्यमंत्री की घोषणा का क्या फायदा सर्कुलर जारी करने वाले स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि क्योंकि प्राइवेट स्कूल को शिक्षकों को वेतन देना पड़ेगा और भवन किराया आदि भी इसके लिए जरूरी है लेकिन सवाल यह है कि आखिरकार इसमें बच्चों का क्या दोस है वह बिना पढ़े स्कूल की ट्यूशन फीस क्यों दें

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डेस्क रिपोर्ट

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