देश का ये शहर कोयला चोरी के लिए रहा है बदनाम

मध्यप्रदेश के सिंगरौली शहर की पहचान ऊर्जा राजधानी के रूप में की जा सकती है क्योंकि यहां पर कोयला और बिजली से जुड़े कारखाने इसकी बड़ी पहचान है। यहां पर कोल इंडिया की कंपनी नार्दन कोलफील्ड यानी एनसीएल अपने 11 प्रोजेक्टों को लेकर पिछले 40 सालों से काम कर रही हैं इसके अलावा अगर बिजली कारखानों की बात करें तो यहां देश के सबसे बड़े थर्मल पावर एनटीपीसी ने अपना प्लांट लगा रखा है जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित छत्तीसगढ़ तक कारखाना फैलाया है इसके साथ ही यहां शुरू होता है कोयले का बड़ा कारोबार कंपनियों के लिए कोयला मायने नहीं रखता बस उसका उत्पादन परिवहन और उससे मिलने वाली आय पर ही सारा ध्यान इनका केंद्रित होता है इस बीच में अगर कुछ कोयला चोरी हो जाता है तो इनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन कोयले के इस काले कारोबार से जुड़े लोगों के लिए।
कोयले का काला खेल
यह न सिर्फ एक बड़ा व्यवसाय हैं बल्कि आमदनी का बड़ा जरिया भी है यहां वर्षों से कोयला चोरी होता आया है छोटे पैमाने पर नहीं बल्कि एक उद्योग की तरह लोग संगठित हैं और कोयला खदानों से चोरी कर खुले बाजार में बेचते आ रहे हैं एक अनुमान के मुताबिक सालाना करोड़ों रुपए का कोयला चोरी संगठित गिरोह करते हैं इसके अलावा फुटकर की कोई गिनती ही नहीं है वक्त बदला तो चोरी करने का तरीका भी बदल गया अधिकारी बदले तो कम या ज्यादा होता रहा पर कोयले का कालो का काला कारोबार कभी बंद नहीं हुआ ऐसा नहीं है
जुगलबंदी से सब संभव है
यह सब इतना आसान था इसमें बकायदे एनसीएल के अधिकारी सिक्योरिटी से जुड़े लोग और स्थानी पुलिस। बराबर की सहयोगी रही है हमेशा से यह आरोप पुलिस के ऊपर लगते रहे हैं कि पुलिस के संरक्षण में कोयला चोरी होता है ना सिर्फ मध्यप्रदेश में बल्कि उत्तर प्रदेश के शक्ति नगर खड़िया जैसे बड़ी कोल खदानों से यह कोई कोरी कल्पना नहीं है बल्कि कड़वा सच है क्योंकि यदा-कदा कमीशन के फेर में कई बार कोयला चोर या तो पकड़े जाते हैं या उनकी गाड़ियां पकड़ी जाती हैं और इसके बाद फिर एक बार यह काला कारोबार शुरू हो जाता है।

डेस्क रिपोर्ट

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