ठिकाने लगाने में माहिर है शिवराज ! अगला नंबर सिंधिया का ?

आज शिवराज घुटनो पर है तो यकीन मानिये कल सिंधिया घुटनो पर बैठे मिलेंगे क्योंकि घुटनो पर बैठ कर जनता का अभिवादन करने वाले शिवराज आमतौर पर जल्दी घुटने नही टेकते है वे कुर्सी की खातिर जमकर संघर्ष करते है और मौका मिलते ही विरोधियों को घुटने टेकने पर मजबूर भी कर देते है

यहां यह बतलाते चलें कि कोई सत्रह साल पहले राधौगढ से चुनाव हार जाने के बाद भी शिवराज ने विषम परिस्थितियों मे घुटने टेकना मंजूर नही किया था

लोग बतलाते है कि शिवराज तब की मुख्यमंत्री उमाभारती के खिलाफ माहौल बनाने मे जुटे रहे और उमाभारती को सी एम की कुर्सी से हटाकर ही उन्होने दम लिया था यद्यपि तब उन्हे सी एम की कुर्सी नसीब नही हुई थी  उमाभारती शिवराज को सी एम बनाये जाने के खिलाफ थी लिहाजा बाबूलाल गौर को मुख्य मंत्री बना दिया गया था

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लेकिन जुझारू तवियत के शिवराज बाबूलाल गौर के लिये लगातार खतरा बने रहे और अंत मे शिवराज को वह सब कुछ मिल भी गया जिसके लिये वे आडवाणी सुषमा और जेटली जी के सामने अक्सर घुटनो पर हुक्म मानने की मुद्रा मे उकड़ू बैठे रहते थे । बहरहाल 2005 सूबे के सी एम बनते ही शिवराज ने सबसे पहले अपने विरोधियों को घुटनो पर बैठने के लिये विवश किया

उल्लेखनीय है कि शिवराज की कूटनीतिक चालों की वजह से प्रहलादपटेल .उमाभारती और गौरीशंकर शेजवार जैसे नेताओ को पार्टी तक छोड़कर जाना पड़ा था उपेक्षित लोगों को अलग पार्टी बनाने के लिये भी मजबूर कर दिया गया था बाद मे कैलाश विजय वर्गीय प्रभात झा और रघुनंदन शर्मा जैसे नेताओं को भी शिवराज ने हाथ जोड़ जोड़कर ठिकाने लगा दिया

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गौरतलब बात यह भी है कि 2018 मे पर्याप्त बहुमत ना मिलने के बावजूद शिवराज ने घुटने नही टेके थे वे अपनी स्टाईल मे कुर्सी की खातिर कमलनाथ सरकार की जड़ों मे मठ्ठा डालते रहे और बाद मे सिंधियां खेमे को कांग्रेस से अलग करके कमलनाथ सरकार को घुटने टेकने के लिये मजबूर कर दिया और खुद सत्ता के शिखर पर जाकर बैठ गये

जाहिर है कि वे उपचुनावो मे तब तक ही घुटनो पर बैठें मिलेंगे जब तक कि वोट नही पड़ जाते है  और जैसे ही वोट पड़ जायेंगे वे सिंधियां को भी घुटने टेकने के लिये मजबूर कर देंगे …

अशोक शुक्ला
9406724870

डेस्क रिपोर्ट

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