छोटी-मोटी नौकरी से बेहतर है स्वयं का काम-धंधा

भोपाल 17 अगस्त 2020। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के कारण पथ विक्रेता और छोटे-छोटे व्यवसाइयों का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हमें हर हालत में उनका काम-धंधा चालू करना है। इसके लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर स्वनिधि योजना से शहरी पथ विक्रेताओं एवं मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रता योजना के माध्यम से ग्रामीण पथ विक्रेताओं को काम-धंधे के लिए 10 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण सरकार उपलब्ध करा रही है। शहरी पथ विक्रेता योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है, जहां देश के 47 प्रतिशत प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री चौहान आज मंत्रालय से प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर स्वनिधि योजना के हितग्राहियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले के पथ विक्रेताओं को यह राशि जल्दी से जल्दी मिल जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुलिसकर्मी अथवा नगरीय निकाय का अमला पथ विक्रेताओं को कार्य करने में अथवा ठेला लगाने में परेशान न करें। वी.सी में नगरीय आवास एवं विकास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव नीतेश व्यास उपस्थित थे।

छोटी-मोटी नौकरी से बेहतर है स्वयं का काम-धंधा

मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को संबोधित करते हुये कहा कि छोटी-मोटी नौकरी से अच्छा है स्वयं का काम-धंधा। इसके लिए सरकार कार्यशील पूंजी दिलवा रही है। उन्होंने बताया कि जब वे 9वीं कक्षा में भोपाल के मॉडल स्कूल टी.टी. नगर में पढ़ते थे तब स्कूल के पास ही एक व्यक्ति फुटपाथ पर प्लास्टिक का सामान बेचता था। देखते ही देखते उसने दुकान लगाना चालू किया और अब वो बड़ा व्यापारी बन गया है। आप सब भी अपना स्वयं का कार्य प्रारंभ कर आगे बढ़ें।

शहरी प्रथ विक्रेता योजना संबंधी प्रमुख बिन्दु
  • योजना में प्रदेश के सभी 378 नगरीय निकायों के 8 लाख 78 हजार 237 पथ विक्रेताओं का पंजीयन।
  • योजना में प्रदेश में एक लाख 67 हजार स्ट्रीट वेंडर्स ने आवेदन किए। आवेदनों को ऑनलाइन बैंकों को भिजवाया गया।
  • योजनान्तर्गत 54 हजार 600 प्रकरण स्वीकृत किए गए, जिनमें 54 करोड़ 60 लाख का ऋण दिया जा रहा है।
  • योजना में 10 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण कार्य-व्यवसाय के लिए।
  • योजना में 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान केन्द्र सरकार व शेष राज्य सरकार देगी।
  • डिजिटल भुगतान करने पर वर्ष में 1200 रूपये तक अनुदान राशि।
  • एक वर्ष में अथवा उससे पूर्व राशि चुकाने पर 20 हजार रूपये का कार्यशील ऋण बिना ब्याज के।
  • ऋण के लिए बैंकों से अनुबंध कर केवल 50 रूपये स्टाम्प ड्यूटी।

डेस्क रिपोर्ट

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