गुनाह तो तुम्हारा भी कम नही …….

मानो या ना मानो… कल नाबालिग लड़की के दुष्कर्मी सिकंदर खान के नजीराबाद स्थित अबैध निर्माण को ढहा दिया गया मगर कई वर्षो से अय्याशी का अड्डा बना सिकंदर खान का अवैध फार्म हाउस कुछ महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया है जिनका जवाब तलाशा जाना जरूरी है मसलन इतने सालों तक उसकाअवैध निर्माण किसकी कृपा से बचा रहा और जब बगैर वैध भवन अनुज्ञा के इसका निर्माण हो रहा था तब नगर निगम का अमला क्या कर रहा था ? अलावा इसके नकली नोट और अन्य दूसरे तरह के अपराधों मे सिकंदर खां की संलिप्तता होने के बावजूद उसे पासपोर्ट सहित हथियारों के लाईसेंस कैसे मिल गये ? कौन उसकी मदद कर रहा था

बहरहाल अकर्मण्यता और नपुंसकता के बीच सुशासन की ऐसी तैसी कैसे होती है यह देखने के लिये आपको कहीं जाने की जरूरत नही है कमोवेश मध्यप्रदेश के सभी जिलों मे प्रशासनिक अमला सुशासन की खटिया खड़ी करता हुआ मिल जायेगा

कैसे ?

जरा भोपाल की इस घटना को देखकर समझने का प्रयास कीजियेगा ……

कुछ साल पहले गणेश विसर्जन के दौरान भोपाल के एक तालाब मे नाव के पलट जाने के कारण 11 लोग काल के गाल मे समा गये थे तब इस घटना पर अकर्मण्य शिरोमणि ने कहा था कि इसमे बड़े नपुंसक हुक्मरानों का कोई कुसूर नही था बात भी सही थी क्योंकि लकवाग्रस्त लुंजपुंज प्रशासन ना तो नाव ही पलटाने गया था और ना ही वह पलटती हुई नाव को सहारा देकर उसे पलटने रोक सकता था यह दीगर बात है कि वह तालाब की सतर्कता बढाकर ऐसी घटनायें रोक सकता था जाहिर है कि अधिकारियों को इस तरह से क्लीन चिट देकर पहले उन्हे गैर जिम्मेदार बनाया जाता है और बाद मे जब कभी कोई बड़ी घटना हो जाती है तब उनका तबादला करके उन्हे बचा भी लिया जाता है ।

फिलहाल दुष्कर्मी सिकंदर खान के मामले मे भी यही हो रहा है विगत दस पंद्रह वर्षो से शातिर अपराधी जो कुछ कर रहा था वह पुलिस और प्रशासन की नजर मे नही था ऐसा मान लेना ठीक नही होगा तब सवाल यह उठता है कि ऐसे मे उन प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही होनी चाहिये जो सिकंदर के आपराधिक मूव्हमेंट के दौरान मूक दर्शक बने हुये थे

वरिष्ठ पत्रकार श्री कुमार कपूर अपने अनुभव के आधार पर कहते है कि इधर कुछ सालो मे प्रशासनिक अमले मे सिर्फ अकर्मण्यता ही नही बढी है बल्कि कुछ बिभागो मे तो नपुंसकता का भी जबरदस्त प्रकोप नजर आ रहा है कपूर साहब ने कहा कि अवैध निर्माण की रोकथाम और बकायाआश्रय शुल्क की वसूली जैसे जरूरी काम केवल इसलिये नही हो पाते हैं क्योंकि रिश्वत और कमीशन के संक्रमण की वजह से निगम का अमला शनैः शनैः नपुंसकता का शिकार हो गया है और अब वह अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही करने मे भी हिचकिचाता है और इसीलिये दुष्कर्म के आरोपी सिकंदर खा का अबैध फार्म हाउस बचा हुआ था

सतना के पूर्व विधायक शंकर लाल तिवारी जी ने भी माना कि प्रशासनिक कमजोरी की वजह से ही सिकंदर जैसे अपराधी इतने दिनो तक बचे रहे और बडे होकर अजगर बन गये उन्होने कहा कि सांप के सर उठाने से पहले ही उसे कुचल देना चाहिये …

 

वरिष्ठ पत्रकार संजय गौतम ने कहा कि सिकंदर की आपराधिक गतिविधियों से कमोवेश सभी लोग वाकिफ थे लेकन प्रशासनिक अकर्मण्यता के चलते लोग पुलिस के पास जाने मे डरते थे जहां तक उसके फार्म हाउस के अवैध निर्माण का प्रश्न है तो इसके लिये नजूल और नगर निगम के लोग पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और उन्हे भी सह अपराधी बनाया जाना चाहिये

पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेदांती त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी अपराधी के फलने फूलने मे प्रशासन की विशेष भूमिका रहती है सिकंदर के मामले मे भी यही हुआ है अब उसके अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्यवाही करके अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश हो रही है

शहर के नामचीन पत्रकार विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि जब दस बारह वर्षों तक सिकंदर और जस्सा जैसे अपराधी अपने आपराधिक साम्राज्य का विस्तार कर रहे थे तब प्रशासनिक अमला कहां था विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि तमाम बुराईयों के लिये प्रशासनिक अकर्मण्यता ही जिम्मेदार है

 

खोजी खबरों के लिये जाने . जाने वाले पत्रकार रमाशंकर शर्मा ने कहा कि प्रशासन की नाक के नीचे सब कुछ होता रहा और प्रशासनिक अमला सोता रहा है जाहिर है कि सिकंदर और जस्सा के मामले मे कहीं ना कहीं प्रशासनिक लापरवाही हुई है इसलिये प्रशासनिक अमले की भी जवावदेही तय होनी चाहिये

डेस्क रिपोर्ट

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