अन्नदाता और सरकार पर मौसम कि मार, कैसे ? तो यहाँ पढ़े

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) – पूरे प्रदेश में जिस तरह अचानक मौसम में परिवर्तन हुआ है उसके बाद तस्वीरें भयावह हो चुकी है एक तरफ जहा किसानो की फसले ओले और बारिश की वजह से बर्बाद हुई है वही दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही की वजह से खरीदी केन्द्रो में खुले आसमान में रखी धान बारिश से भीग गयी जिसकी मात्रा हजारो कुंटल बताई जा रही है पर अधिकारी नियमो का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ने में जुटे हुए है विंध्य की बात करे तो सतना (SATNA) , रीवा (REWA) , सीधी (SEDHI) और सिंगरौली(SINGRAULI) में बारिश और ओले की वजह से खासा नुक्सान हुआ है फसलों की नुक्सानी तो सर्वे के बाद किसानो को मिल जाएगी भले ही वो किसानो के किसी काम की ना हो पर खुले आसमान में खरीद केन्द्रो में जो नुक्सान हुआ है उसके लिए किसे दोषी ठहराया जाएLIगा ये बड़ा सवाल है क्योकि ऐसे केंद्रों की में अनाज के रखरखाव की सारी जबबदारी केन्द्रो के संचालको की होती है और अगर अनाज यहाँ खराब हुआ है तो स्वाभाविक है लापरवाही भी उन्ही की है पर प्रशासन नियमो के जाल में फसा कर ऐसे खरीदी केन्द्रो के संचालको हर बार बचा ले जाता है ऐसा क्यों होता है ये तो वही जाने

ऐसी है तस्वीरें

नजारा सिंगरौली (SINGRAULI) जिले का है जहा मौसम में आए अचानक बदलाव के बाद शनिवार से रविवार शाम तक रूक रूककर हुई तेज बारिश से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ वहीं जिले के खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे रखी सैकड़ों क्विंटल धान भीग गई।सरकारी धान खरीदी केंद्रों की अव्यवस्थाओं की यहाँ कलाई भी खुलती नजर आ रही है जल्द परिवहन न हुआ तो संकट और गहरा सकता है, बावजूद इसके सिस्टम नहीं सुधर सका और अन्नदाता के खून पसीने से सींचा गया हजारों क्विंटल धान बारिश में बर्बाद हो गया.जिले की कई समितियों में खुले आसमान में धान पड़ा है लेकिन परिवहन नहीं हो पा रहा है. कुछ केंद्र ऐसे हैं जहां धान रखने के इंतजाम भी नहीं है. खुले में धान रखा होने से उसका जो हाल हुआ है उसे देख सरकारी सिस्टम के रवैये पर हैरानी होती है. दरअसल जिले के किसान सारे देश और प्रदेश की भूख मिटाने के लिए अनाज पैदावार कराते हैं, उसी जिले के अन्नदाताओं की खून पसीने की महीनों की मेहनत किस तरह से सरकारी बदइंतजामी की भेंट चढ़ रही है.

AAD

डेस्क रिपोर्ट

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