आज भी कायम है बिहार कोकिला की आवाज में ”कहे तोहसे सजना ये तोहरी सजनियां” वाला जादू

The magic of "Kahe tohse sajna ye tohri sajniya" still prevails in the voice of Bihar Nightingale.

बेगूसराय, 30 सितम्बर । बिहार में कोई भी पर्व-त्यौहार हो या लोक उत्सव, विवाह की शुभ घड़ी हो या मुंडन का समय, विदाई की बेला हो या स्वागत का समय शुभ अवसर, किसी भी मौके पर गूंजने वाली आवाज की मल्लिका शारदा सिन्हा एक अक्टूबर को 68 साल की हो जाएंगी लेकिन आज भी उनकी आवाज में वही जादू है जो 80 के दशक के सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया के गीत ”कहे तोहसे सजना ये तोहरी सजनियां” में था।बेगूसराय जिला के सिहमा की बहू बिहार कोकिला पद्मश्री शारदा सिन्हा भले ही समयाभाव के कारण साल में दो-चार बार ही बेगूसराय आ पाती हैैं लेकिन किसी भी अवसर पर बिहार ही नहीं देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में जब शारदा सिन्हा के गीत गूंजते हैं तो बेगूसराय के लोग ना सिर्फ झूम उठते हैं, बल्कि गर्व से सीना और भी चौड़ा हो जाता है।

औद्योगिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में चर्चित बेगूसराय की बहू के गाए छठ गीत छठ के पर्याय बन चुके हैं और बिहार, भारत ही नहीं विदेशों में भी उसकी धूम मच रही है। आज भले ही दर्जनों गायक छठ गीत तैयार कर रहे हैं, लेकिन उसके भाव और मूल में शारदा सिन्हा द्वारा गाए गए छठ गीत ही हैं। जब छठ में गीतों का इतना प्रचलन नहीं था और सिर्फ विंध्यवासिनी देवी एक-दो गीत सुनने को मिलते थे, तो 1978 में शारदा सिन्हा ने पहली बार ”उगो हो सूरज देव भइल अरघ केर बेर” छठ गीत रिकॉर्ड किया था लेकिन किसी कैसेट कंपनी ने रुचि नहीं ली। काफी अनुरोध के बाद तथा कैसेट नहीं बिकने पर क्षति की भरपाई करने का आश्वासन देने पर एचएमवी कैसेट कंपनी ने कैसेट बनाया। वह कैसेट इतना छा गया कि खुद कंपनी वाले लगातार गीत रिकॉर्ड करने का अनुरोध करने लगे। छठ, विवाह, मुंडन, जनेऊ, विदाई, श्रद्धांजलि गीत के अलावा लोक उत्सव सामा चकेवा आदि के गीत भी शारदा सिन्हा ने इतनी बखूबी से गाया है कि लोग बार-बार सुनते हैं।

फिल्म मैंने प्यार किया का गाना ”कहे तोह से सजना तोरी सजनीयांं” आज भी लोगोंं की जुबान पर है। ”पिरितिया काहे ना लगवले, पटना से बैदा बोलाइ द, पनिया के जहाज से पलटनिया बनि अइह पिया, केकरा से कहां मिले जाल” जितना भी बार सुना जाए नया ही लगता है। एक अक्टूबर 1952 को सुपौल में पैदा हुई शारदा सिन्हा की शादी जब बेगूसराय के सिहमा निवासी ब्रज किशोर प्रसाद सिन्हा के साथ हुई तो ससुराल में गायकी को लेकर विरोध भी हुआ लेकिन पति और पिता ने हमेशा साथ दिया। प्रतिष्ठित गुरुओं से शास्त्रीय संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त शारदा सिन्हा ने मैथिली, भोजपुरी, हिंदी और बज्जिका भाषाओं में गायन किया है, यह बात सभी लोग जानते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि गायन के साथ वे मणिपुरी नृत्य में भी पारंगत हैं।

राजश्री प्रोडक्शन के सुपरहिट फिल्म हम आपके हैं कौन में विदाई के समय शारदा सिन्हा द्वारा गाया गया गाना ”बाबुल जो तुमने सिखाया” सुनकर आज भी महिलाएं रो पड़ती है, तमाम शादी समारोह में शारदा सिन्हा के अन्य गीतों के साथ यह गीत भी खूब बजते हैं। उन्होंने अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में चर्चित गीत ”तार बिजली से पतले हमारे पिया, ओ री सासु बता तूने ये क्या किया” गाया है।

1988 में मॉरीशस के 20वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने गायन की प्रस्तुति देने वाली शारदा सिन्हा को 2009 के बिहार विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने अपना ब्रांड एंबैसडर बनाया था। बिहार की लोक संस्कृति को बनाए रखने के लिए भारत सरकार द्वारा 1991 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित बिहार कोकिला को 2001 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 2015 में बिहार सरकार द्वारा सिनेयात्रा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपनी गायकी और जादुई आवाज से किसी भी पर्व-त्यौहार या उत्सव में लोक रंग भरने के लिए भारत सरकार द्वारा 2018 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

डेस्क रिपोर्ट

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