GLORY: ऐसा शिवलिंग जिसे तोड़ने पंहुचा था औरंगजेब लेकिन उसे जान बचा कर भागना पड़ा , कहाँ है यह स्थान, क्या है पूरी कहानी यहाँ पढ़ें !

मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक ऐसा शिव मंदिर है जहाँ स्थापित शिवलिंग को तोड़ने का प्रयत्न मुग़ल आक्रांता औरंगजेब ने किया था लेकिन भोलेनाथ की महिमा ऐसी हुई की औरंगजेब को वहां से जान बचा कर भागना पड़ा था, सतना शहर से 35 किलोमीटर दूर बिरसिंहपुर इलाके में स्थित यह शिवमंदिर गैवीनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है जहाँ आम दिनों में तो शिवभक्तों का तांता लगा ही रहता है लेकिन सावन के पवित्र महीने में दूर दूर से हजारों लोग यहाँ दर्शन के लिए आते है

GLORY: ऐसा शिवलिंग जिसे तोड़ने पंहुचा था औरंगजेब लेकिन उसे जान बचा कर भागना पड़ा , कहाँ है यह स्थान, क्या है पूरी कहानी यहाँ पढ़ें !
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पद्म पुराण में उल्लेख है की बिरसिंहपुर में स्थित गैवीनाथ धाम को त्रेता युग के दौरान देवपुर कहा जाता था। पद्म पुराण के पाताल खंड में इस स्थान और गैबीनाथ मंदिर का वर्णन है। जहां देवपुर में राजा बीर सिंह का शासन था। जो महाकाल के अनन्य भक्त थे। वह घोड़े पर सवार होकर प्राचीन नगर उज्जैन जाते थे। सालों तक ऐसा चलता रहा, लेकिन जब राजा बूढ़े हुए तो उन्होंने अपनी व्यथा बता कर प्रार्थना की । तब महाकाल ने स्वप्न में राजा से कहा कि वे उन्हें देवपुर में ही दर्शन देंगे ।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज गैवीनाथ की पूजा करते हुए
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तभी कस्बे में गैबी यादव नाम के एक व्यक्ति के चूल्हे से एक शिवलिंग निकला, लेकिन गैबी की मां ने शिवलिंग को वापस जमीन के अंदर कर दिया ।महाकाल फिर एक दिन राजा बीर सिंह के सपने में आए और कहा कि वह प्रकट होना चाहते हैं किन्तु गैबी की मां उन्हें प्रकट नहीं होने देती । अंत में राजा गैवी के घर पहुंचे और उस स्थान पर एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जहां से शिव बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे , और महाकाल के आदेश के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा गैवीनाथ के रूप में की गई । गैवीनाथ मंदिर में स्थित शिव लिंग को महाकाल का रूप माना जाता है।

औरंगजेब ने किया था मंदिर पर आक्रमण

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज गैवीनाथ की पूजा करते हुए
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मंदिर के प्रधान पुजारी विनोद कुमार गोस्वामी के अनुसार, देश भर के मंदिरों की तरह, मुस्लिम आक्रांताओं ने इस मंदिर को नुकसान पहुंचाकर गैवीनाथ के शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे शिव लिंग के आधे हिस्से को ही नुकसान पहुंचाने में कामयाब रहे। और उन्हें जान बचाकर यहाँ से भागना पड़ा। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, 1704 में मुगल आक्रमणकारी औरंगजेब हिंदू मंदिरों को नष्ट करते हुए बिरसिंहपुर पहुंचा था। औरंगजेब के साथ उसकी एक सेना भी थी।

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औरंगजेब ने पहले अपनी तलवार से यहाँ स्थापिगत गैवीनाथ शिवलिंग पर प्रहार किया लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहा, उसने अपनी सेना को हथौड़ों और छेनी से शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास करने का आदेश दिया। कथित तौर पर, शिवलिंग पर पांच हमले हुए थे। जिसके पहले हमले में शिवलिंग से दूध निकला, दूसरे हमले में शहद, तीसरे हमले में खून और चौथे हमले में गंगा जल निकला।

मान्यता है की जैसे ही औरंगज़ेब की सेना ने शिवलिंग पर अपना पाँचवाँ हमला किया, लाखों मधुमक्खियाँ शिवलिंग से निकलने लगीं में, और मधुमक्खियों ने औरंगज़ेब और उसकी पूरी सेना पर हमला कर दिया मधुमक्खियों के हमले से अपनी जान बचाकर भाग गईऔरंगजेब और उसकी सेना बिरसिंहपुर के गैवीनाथ मंदिर से भाग खड़ी हुई

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सतना न्यूज डेस्क

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