दशहरा में देवी को चढ़ाते हैं 75 बकरे, मुर्गा, मछली, अंडे और देसी शराब से होती है पूजा

दशहरा समिति ने बताया कि पूर्व वर्षों के अनुसार यहां 75 के अतिरिक्त 8 से 10 तक बकरों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है

एक तरफ जहां नवरात्र आते ही सामान्यतः स्त्री पुरुष सात्विक हो जाते हैं मांसाहारी लोग भी मां के नवरात्रि में मांस और मदिरा का सेवन बंद कर देते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में एक देवस्थान ऐसा है जहां पर दशहरे के दिन 75 से अधिक बकरों की बलि दी जाती है इसके अलावा मुर्गा, मछली, अंडे तथा देशी शराब से पूजा अर्चना की जाती है यहां अष्टमी को सबसे ज्यादा 11 बकरों की बलि दी जाती है जी अब हम बात कर रहे हैं जगदलपुर मनाए जाने वाले 75 दिवसीय दशहरे की बस्तर की

दशहरा समिति ने बताया कि बस्तर संभाग में रियासत कालीन 75 दिवसीय दशहरा की परंपरा है और इसके अनुसार 80 से अधिक पूजा विधान यहां संपन्न किए जाते हैं दशहरा समिति ने बताया कि पूर्व वर्षों के अनुसार यहां 75 के अतिरिक्त 8 से 10 तक बकरों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है बकरों के अलावा बस्तर दशहरा पर्व आयोजन के दौरान प्रशासनिक देखरेख में 3000 नारियल 5000 लीटर देसी शराब तथा 400 क्विंटल चावल की व्यवस्था की जाती है

75 दिनों तक चलने वाले दशहरा को दुनिया का सबसे लंबा अवधि तक चलने वाला पर्व भी माना जाता है जो सावन महीने की अमावस्या अर्थात हरियाली अमावस्या के दिन प्रारंभ होता है और अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन इस पर्व का समापन होता है इस तिथि के पश्चात भी आमंत्रित देवी देवताओं की विदाई का आयोजन संपन्न होता रहता है

डेस्क रिपोर्ट

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