सतना

अधिकारियों की लापरवाही : ओपन कैम्प में दोबारा उग गई धान

सतना : मध्य प्रदेश में किसान प्रकृति नही बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो रहा है, जी हाँ हम बात करे अगर उस धान की जो साल भर से ओपेन कैम्प में खुले में रखी हुई है और अब दोबारा बोरो में उगने को मजबूर है तो ऐसे में जिम्मेदारों पर उंगली उठाना लाजमी है, सतना में भी कुछ ऐसे ही हालात है जहाँ 70 फीसदी धान ओपन कैम्प में बोरों के अंदर उगने लगी है विपणन संघ द्वारा खरीदी गई करोड़ों की धान ओपन कैंप में भरस्टाचार की भेंट चढ़ गई जिम्मेदर अब अपनी जवाब देही से बचने के लिए अब एक दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे है।

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सतना जिले में गेहूँ उपार्जन का काम शुरू हो गया है जबकि पहले से ही 70 फीसदी खुले में रखी धान का उठाव नहीं हुआ है आलम ये है कि पिछले एक वर्ष से खुले में रखी करोङो की धान अब दोबारा बोरो में उगने लगी है।शासन की गैर जिम्मेदाराना और लापरवाही का नमूना भला इससे बेहतर क्या हो सकता है कि करोडो की धान की समय पर मिलिंग नही की गई बल्कि उठाव के लिए समितियो के फेर में पड़कर बर्बाद हो गयी

दोबारा बोरो में उगने लगी धान
दोबारा बोरो में उगने लगी धान

अब जब इस कोरोना महामारी के बीच किसान की गेहूँ उपार्जन का काम शुरू हुआ तो अनन फानन जिला प्रशासन ने धान की मिलिंग का काम शुरू कर दिया लेकिन है हैरानी तो ये है कि अब पछताए का हुआ जब चिड़िया चुग गयी खेत, मतलब साफ है कि अब जब करोड़ो की धान उगने लगी है तो भला मिलिंग करने का क्या औचित्य है साफ जाहिर है किसान से खरीदी करोडो की धान नान और मार्कफेड के दो पाटों में पीस कर रह गयी।

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