FEATUREDसीधी-सिंगरौली

लॉक डाउन : क्वांरेटाइन सेंटर में हुआ बच्चे का जन्म

सीधी : देश मे फैली कोरोना वायरस महामारी की वजह से हुये लाकडाउन में फासे छत्तीसगढ़ की एक महिला ने क्वांरेटाइन सेंटर में बच्ची को जन्म दिया है,जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित है,यह परिवार सीधी के आदिवासी इलाके में मनिहारी सामग्री की फेरे लगाकर अपना गुजर बसर कर रहा था,लाकडाउन होने की वजह से 40 से अधिक इन्ही के परिवार के लोग सीधी में फस गये है,जहाँ जिला प्रसासन ने सभी परिवारों के लोगो को एक आदिवासी छात्रा वास में क्वांरेटाइन में रखा है,हालांकि क्वांरेटाइन सेंटर में रखे जाने की समय सीमा अधिक हो चुकी है,लेकिन कोई गाईडालन ना होने की वजह से प्रसासन इन्हें अपने प्रदेश जाने की छूट नही दे पा रहा है,ट्रायवल असिस्टेंट कमिश्नर ने इनकी हर संभव मद्त करने की साहस दे रहे है।

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मामला सीधी जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर आदिवासी बालक छात्रावास टिकरी में पिछले 26 दिनों से क्वारेंटाइन की गई छत्तीसगढ़ की एक महिला समुद्री बाई पति करमचंद्र ने आज सेंटर में तैनात चिकित्सकीय दल कि उपस्थिती में बच्ची को जन्म दिया,मौके पर पहुँचे ट्रायवल असिस्टेंट कमिश्नर डॉ के के पांडे ने प्रसवोउपरांत जच्चा-बच्चा को सुरक्षा के लिहाज से स्वास्थ्य केन्द्र मड़वास में भर्ती करा दिया है,जहाँ अब जच्चा बच्चा दोनों खतरे से बहार बताये गये है,यहाँ परिवार छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर जिले के देवतीकारा गाँव के निवासी है,जो आदिवासी वनांचल इलाके में फेरी लगाकर फटे-पुराने कपड़े लेकर महिलाओं को उनके जरूरत कि सौंदर्य सामग्री का व्यसाय कर अपना गुजर बसर कर रहे थे,लाकडाउन की वजह से टिकरी आदिवासी विकास विभाग के तीन छात्रावासों में 43 महिला-पुरुष श्रमिकों को पिछले 30 मार्च को क्वारेंटाइन किया गया था,इनमें करोना वायरस संक्रमण के कोई भी लक्षण नहीं पाये गये हैं

राज्य के भीतर के क्वारेंटाइन किये गये लोगों को उनके घर वापस कर दिया गया है, किन्तु अंतर्राज्जीय लोगों को वापस भेजने हेतु शासन का निर्देश न होने की वजह से यह लोग निर्धारित 14 दिन से अधिक अवधि से आदिवासी बालक छात्रावास टिकरी में क्वारेंटाइन हैं,ट्रायवल असिस्टेंट कमिश्नर का कहना है कि यहाँ छत्तीसगढ़ राज्य के रहने बाले है,यहां फेरी लगाकर व्यवसाय करने का काम करते थे,उसी तारतम्य में वह आदिवासी अंचल टिकरी आये थे। सम्पूर्ण लॉक डाउन के कारण जिला प्रशासन ने उन्हें एतिहात के तौर पर आदिवासी छात्रावास में क्वारेंटाइन कर दिया था,इस परिवार का हर संभव जो भी मद्त हो सकेगी वह जिला प्रसासन करेगा

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