मध्यप्रदेश

ये है ज्योतिरादित्य सिंधिया की शेरनी, पढ़े और जाने

यु तो राजनीति में किसी पर भरोसा करना नहीं सिखाया जाता और ना ही राजनीति का सिद्धांत है विश्वास, राजनीति का सिद्धांत तो महज सिर्फ इतना सा है कि आगे बढ़ने के लिए जो भी रास्ता इख़्तियार करना पड़े बनाओ और आगे बढ़ जाओ, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने इस रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए जितनी सीढ़ियों बनाई है वह आपके परिवार से हैं या परिवार के बाहर से , लेकिन वर्तमान परिवेश में जिस तरह से राजनीति मध्यप्रदेश में हुई है उसने इस परिभाषा को बदल कर रख दिया है खासकर ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगर बात हो रही है तो उन्होंने 22 विधायक विधायकों के साथ मिलकर जो मध्यप्रदेश में इतिहास लिखा है वह कुछ ऐसा ही है, याद करिए इमरती देवी जिन्होंने यह तक कह दिया था कि अगर महाराज कहेंगे तो मैं कुएं में भी कूद जाऊंगी यह भरोसा था ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए, यही वजह थी कि मध्य प्रदेश का इतिहास लिखा गया जिसमें इमरती देवी जैसे 22 विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए समर्पित नजर आए, इसलिए यह कहा जा सकता है कि इमरती देवी सही मायने में सिंधिया की शेरनी रही हैं जो सिंधिया के कहने पर कुएं में कूद जाने तक की बात कह रही थी और यह भी कह दिया था कि तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा जिसके बाद सिंधिया की आंखें भी नम हो गई थी 22 विधायकों ने मध्य प्रदेश के इतिहास में कम से कम यह तो लिख दिया है कि वफादारी से भी राजनीतिक इतिहास लिखे जा सकते हैं, इमरती देवी के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डबरा को जिला बनाने की लड़ाई भी लड़ चुके है इसके अलावा डबरा के विकास के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया इमरती देवी के लिए वरदान साबित हुए है विपक्ष में रहते हुए भी ज्योतिरादित्य सिंधिया सबसे ख़ास वजह रहे हैं कि इमरती देवी लगातार तीसरी बार 60 हजार से अधिक मतों से जीती हैं

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