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देश का इकलौता पूजा जाने वाला खंडित शिवलिंग सतना में ! पढ़े क्यो होती है खंडित शिवलिंग की पूजा 

पुराणों की मानें तो हिन्दू धर्म में खंडित प्रतिमा की पूजा करना वर्जित है। फिर भी बिरसिंहपुर ( Birsinghpur  ) के गैवीनाथ ( Gaivinath Shiv Temple ) धाम में खंडित शिवलिंग  को बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है  । कहा जाता है कि गैवीनाथ धाम देश की एकलौती ऐसी जगह है जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है। दावा किया जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग त्रेता युग काल का है

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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यहाँ क्यो होती है खंडित शिवलिंग की पूजा ?

मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh ) के सतना ( Satna ) जिले में स्थित बिरसिंहपुर गैवीनाथ धाम का इतिहास बड़ा ही निराला है। कहते है कि सन 1704ई. में मुगल शासक औरंगजेब ने देवपुर नगरी में हमला किया था। आसपास के क्षेत्रों में आस्था का केन्द्र बने गैवीनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग को तोडऩे का उसने प्रयास किया था । औरंगजेब गैवीनाथ के विशाल  शिवलिंग को तोड़ कर खंड खंड करना चाहता था और इसीलिए बड़ी बड़ी छेनियों और हथौड़ों के जरिए उसने अपनी सेना से शिवलिंग पर वार करवाएँ । हथौड़े और छेनियों के हमले से शिवलिंग के बीच में एक मोटी दरार आई , कहते है उसी दरार से थोड़ी ही देर में लाखों मधुमक्खियां निकलने लगी और औरंगजेब की सेना पर मधुमखियों ने धावा बोल दिया । मधुमक्खियों के हमले से औरंगजेब सहित उसकी सेना को जान बचाकर भागना पड़ा।   इस घटना के बाद से लोगों का विश्वास है कि भगवान भूतनाथ यहां स्वयं विद्यमान हैं । इस घटना को भगवान भोलेनाथ का चमत्कार मानकर लोग उन्ही खंडित शिवलिंग की पूजा अभी तक करते आ रहें है ।

शिवरात्रि पर उमड़ेगी भक्तो की भीड़

वैसे तो प्रतिदिन यहां शिवभक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन महाशिवरात्रि ( Maha Shivratri ) के अवसर पर  गैवीनाथ धाम में भगवान भोलेनाथ के दर्शन को भक्तों की भीड़ उमड़ती है  । प्रशासन ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहां शिवरात्रि से पहले मंदिर और सुरक्षा व्यवस्था इत्यादि का जायजा लिया है खुद सतना के कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने गैवीनाथ धाम पहुंच कर भोलेनाथ की पूजा अर्चना की और शिवरात्रि मेले पर यहां पधारने वाले शिवभक्तों को किसी तरह की असुविधा न उठानी पड़े इसके मद्देनजर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए ।

AAD

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