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आखिर कब बनेगा पृथक विंध्य प्रदेश?

विंध्य प्रदेश -डिजिटल डेस्क

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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यूं तो प्रथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग दशकों से यदा-कदा कहीं न कहीं से उठती रही है, मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने एक बार फिर इस मांग को हवा दे दी है ज्यादा दूर अगर ना जाएं तो अभी 2 नवंबर 2019 में बघेलखंड विंध्य आदर्श समाज समिति और आभा रविंद्र क्रांति मंच ने मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन में एक दिवसीय धरना देकर प्रथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग की और उसका ज्ञापन सौंपा, उमाशंकर तिवारी इस के अगुआ बने थे। इसके अलावा सफेद शेर के नाम से मशहूर दबंग नेता स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी भी पृथक विंध्य प्रदेश की लौ जलाते रहे हैं। राजधानी बनाने को लेकर के विंध्य में विवाद की स्थिति भी रही है क्योंकि कुछ लोगों का मानना था कि रीवा संभागीय मुख्यालय है इसलिए रीवा को राजधानी बनाना चाहिए साथ ही सतना और उसके आसपास से जुड़े हुए जनप्रतिनिधियों ने सतना को राजधानी बनाने का समर्थन किया क्योंकि सतना इंडस्ट्रियल एरिया है

सतना रीवा, सीधी शहडोल अनूपपुर उमरिया पन्ना, छतरपुर टीकमगढ़ सहित कई अन्य जिलों को मिलाकर पृथक विंध्य प्रदेश बनाने का सपना यहां के लोगों ने सजा रखा है, लोगों का इसमें यह भी मानना है कि संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए विंध्य प्रदेश अपने आप में समृद्धि और संसाधनों से भरपूर है इतना सब कुछ होते हुए भी इस इलाके का जितना विकास होना चाहिए और जिस गति से होना चाहिए वह अब तक नहीं हुआ।

इतिहास में विंध्य

इतिहास के दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की कुछ रियासतों को मिलाकर बघेलखंड एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और जिसकी राजधानी रीवा रियासत थी 1 नवंबर को इन सभी रियासतों को मिलाकर एक पूरा मध्य प्रदेश बना दिया गया। सिर्फ रीवा की अगर बात करें जिसे हम विंध्य प्रदेश भी कह सकते हैं। उसका क्षेत्रफल 23000 मील लगभग था विंध्य प्रदेश का रिसोर्स कितना जबरदस्त है? इसका आंकड़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की कई करोड़ में यहां रेबनयु जनरेट हो रहा था लेकिन मध्यप्रदेश में विलय के साथ ही बघेलखंड या यूं कहें विंध्य प्रदेश का अस्तित्व खतरे में आ गया। भोपाल और इंदौर जहां तेजी से बढ़े वहीं विंध्य प्रदेश के सतना रीवा सहित कई जिले काफी पीछे चले गए बड़ी वजह अगर कहा जाए तो राजनेता भी रहे हैं क्योंकि कुछ कुछ नेताओ को छोड़ दिया जाए तो किसी बड़े नेता ने अलग विंध्य प्रदेश की मांग को पुरजोर तरीके से नहीं उठाया जिसकी वजह से मांग ने जोर नहीं पकड़ा। अब इस मामले में जरूरत इस बात की भी है की राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करें और अलग विंध्य प्रदेश बनाए, जो 2001 विधानसभा ने पृथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया गया था उसे पूरा करें पृथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग को लेकर बुंदेलखंड के लोगों के विरोध की बात भी कही गई थी लेकिन 2001 में हुई एक सभा के दौरान बुंदेलखंड के कई विधायकों और सांसदों ने इस बात में अपनी सहमति भी दे रखी है कि अगर अलग बुंदेलखंड बनता है तो उनके लिए ज्यादा आसानी हो जाएगी और वह पृथक विंध्य प्रदेश में शामिल होने को राजी हैं इसलिए जरूरत इस बात की है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर प्रयास करें और पृथक विंध्य प्रदेश बनाये  इन इलाकों में भी विकास की नई धारा प्रवाहित करें

 

 

AAD

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