देश

भारत रत्न नानाजी की कर्मभूमि में गणतंत्र दिवस

दीनदयाल शोध संस्थान ने गणतंत्र दिवस पर गांव-गांव दिया स्वावलम्बन का संदेश
खुशहाली की ओर अग्रसर होने के लिये 108 ग्रामीण केन्द्रों पर ली गई शपथ

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चित्रकूट / सतना – इकत्तरवां गणतंत्र दिवस दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा चयनित 108 स्वावलंबन ग्राम केन्द्रों में समारोह पूर्वक मनाया गया। संस्थान के कार्यकर्ता गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ही इन गांवों में पहुंच गये थे, उन्होंने रात्रि विश्राम भी ग्रामवासियों के साथ गांवों में ही किया। प्रातः प्रभातफेरी के जयघोषों से जैसे पूरा चित्रकूट अंचल गूंज उठा। इन गांवों में लोगों ने इस दिन विशेष साफ-सफाई और साज-सज्जा की थी। अपने-अपने घरों के सामने खड़े होकर ग्रामीण परिवारों ने प्रभातफेरी दल पर पुष्प वर्षा भी की। ग्राम केन्द्रों के विद्यालय प्रांगणों में ग्रामवासियों का सामूहिक एकत्रीकरण हुआ। ध्वजारोहण, राष्ट्रगान के पश्चात ग्रामवासियों ने स्वावलंबन के संकल्प का स्मरण किया और खुशहाली की ओर अग्रसर होने के लिये 108 ग्रामीण केन्द्रों पर शपथ ली गई। तत्पश्चात उत्साह और उमंग से भरपूर विविध और बहुविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां हुईं। संविधान में वर्णित मूल अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी से बच्चों-बड़ों को अवगत करवाया गया। गांवों के सर्वमान्य जनों ने बच्चों का मार्गदर्शन कर उनका उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर अलग-अलग ग्राम केन्द्रों पर ग्राम विकास समिति, तरूण मण्डल, महिला मण्डल और भजन मण्डलों की बैठकें सम्पन्न हुईं। इन बैठकों में सामूहिक प्रयत्नों से सम्पन्न हुये कार्यों की जानकारी समिति और मण्डलों के सदस्यों द्वारा रखी गयी, जिससे पता चलता है कि संस्थान के प्रयासों से ग्रामवासियों में आयी जागरूकता के परिणामस्वरूप सरकारी योजनायें इन ग्रामों में अधिक सफल हुयी हैं, भ्रष्टाचार कम हुआ है। बाल विवाह, बालश्रम, पर्दाप्रथा, घरेलू महिला हिंसा, कन्या भ्रूण हत्या, अस्पृश्यता, झाड़-फूंक, जादू-टोना जैसी सामाजिक बुराइयां, समाप्त हुई हैं, विषमता कम हुई है और परस्पर-पूरकता का वातावरण निर्मित हुआ है। इन गांवों में गरीबी, बेकारी, बीमारी, अशिक्षा, असुरक्षा, अस्वच्छता, आपसी विवादों जैसे मुद्दों पर संस्थान के प्रयासों को उल्लेखनीय सफलता मिली है। बैठकों में संस्थान के दिशादर्शन में ग्राम विकास की आगामी कार्ययोजनाओं को अन्तिम रूप दिया गया।
भारत रत्न नानाजी ग्रामीण पुनर्रचना के अपने काम को हमेशा आजादी से जोड़कर देखते थे। वे कहते थे कि जब तक गाँवों में आजादी अनुभव नहीं होती तब तक भारत की आजादी अधूरी है। ऐसी वास्तविक आजादी के लिये ही अपना सारा काम है और इसी दृष्टि से आप सभी से राष्ट्रीय पर्वों पर ग्राम केन्द्रों में एक साथ प्रवास करने का आग्रह होता है। नानाजी ने इस परम्परा की शुरूआत की जिसके परिणाम स्वरूप धीरे-धीरे चित्रकूट क्षेत्र के गाँवों में प्रतिवर्ष आजादी का जश्न अब देखने लायक बन रहा है। इकत्तरवे गणतंत्र दिवस पर ग्रामवासियों ने नानाजी का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के सभी प्रकल्पों आरोग्यधाम, उद्यमिता विद्यापीठ, सुरेन्द्रपाॅल ग्रामोदय विद्यालय, आयुर्वेद कालेज, गुरुकुल संकुल, रामनाथ आश्रमशाला, सियाराम कुटीर में हर्षोल्लास के साथ ध्वजारोहण कर मिष्ठान का वितरण हुआ तथा सभी प्रकल्पों के प्रमुख कार्यकर्ता स्वावलम्बन केन्द्रों पर जाकर ध्वजारोहण में शामिल हुए। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन चित्रकूट जनपद के ग्राम लोढ़वारा में सम्मिलित हुए जिसमें संस्थान की बात रखते हुए अभय महाजन जी ने कहा कि जिस तरह स्वाधीनता से पहले प्रत्येक राष्ट्र भक्त के लिये स्वाधीनता की भावना प्रेरणा का मुख्य स्त्रोत हुआ करती थी उसी तरह स्वाधीनता के बाद सामाजिक स्वावलम्बन का स्वप्न प्रत्येक राष्ट्रभक्त के लिए प्रेरणा का मुख्य स्त्रोत होना चाहिए और इस दिशा में उसे सतत् क्रियाशील रहना चाहिए और लोग अपने अधिकारों के साथ कर्तव्य पालन की दिशा में प्रेरित हों का संदेश दिया।

AAD

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