मध्यप्रदेश

रिटायर्ड वैज्ञानिक की मदत से आधी कीमत पर बना देसी वेंटिलेटर

इंदौर: कोरोना के गंभीर मरीजों को आ रही वेंटीलेटर की समस्या को देखते हुए शहर के एक उद्योगपति ने आधी कीमत में देसी वेंटिलेटर बना लिया है विदेश से लौटे डॉक्टर दंपति की तकनीक और कैट के रिटायर्ड साइंटिस्ट की सहायता से यह हो सका है उनके वेंटीलेटर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अनुमति दे दी है पोलोग्राउंड में साईं प्रसाद उद्योग के संचालक संजय पटवर्धन ने बताया कि नॉन इन्वेजिव टाइप का वेंटीलेटर 10 माह में तैयार हुआ है

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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बता दें कि इसकी कीमत लगभग 50000 है जबकि विदेशी वेंटीलेटर एक डेढ़ लाख में मिलते हैं यह कम ऑक्सीजन फ्लो बीच में भी सपोर्ट करता है सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने पर तीन-चार घंटे वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को दे सकेगा मरीज को कहीं भी शिफ्ट करना हो या फिर छोटी सी जगह पर मरीज गंभीर हो जाए और संक्रमण 50 से 60 फ़ीसदी हो तो ऐसी स्थिति में यह जिंदगी बचा सकता है इसका वजन 2 किलो है जिससे इसे आसानी से कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है

यूरोप मानको के अनुसार बना है

बताते चलें कि डॉ एसके भंडारी और उनकी पत्नी डॉ पूर्णिमा के पास इसकी तकनीकी थी कैट के रिटायर वैज्ञानिक अनिल थिप्से ने सहायता की मेडिकल उपकरण के लिए आवश्यक लाइसेंस लेने यूरोप के मानक के अनुसार बनाने के लिए पार्ट्स अमेरिका मुंबई आदि जगह से मंगाए टेस्टिंग रजिस्ट्रेशन आदि में काफी अधिक समय लगा

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वेंटीलेटर की आवश्यकता इसलिए पड़ती है

वही वेंटीलेटर तब उपयोग में आता है जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाता वेंटीलेटर दो तरह के होते हैं पहला इन्वेजिव जिसमें लंग्स तक पाइपलाइन जाती है दूसरा नॉन इन्वेजिव जिसमें नाक में पाइपलाइन जाती है मरीज के लंग्स चलते हैं

 

 

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RED MOMENTS STUDIO

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