FEATUREDसीधी-सिंगरौली

SINGRAULI मैं सीएम की कसम खाता हूं मैं रिश्वत नही खाता हूं

सिंगरौली 5 नवंबर । क्या कोई पटवारी यह कसम खा सकता है कि मैं सीएम की कसम खाता हूं मैं रिश्वत नहीं खाता हूं लेकिन ऐसा डायनासोर की तरह विलुप्त हुई प्रजाति में से एक पटवारी पदस्थ है जो यह कसम खाने को भी तैयार है यह अलग बात है कि पटवारी साहब ने महज 13 साल की नौकरी में अपने लिए आलीशान कोठी बनवा ली है तो आइए एक बार फिर पढ़िए इमानदार पटवारी के किस्से

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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हाल ही में पजरेह से स्थानांतरित बैढ़न पटवारी अपनी कार्य प्रणालियों की वजह से आए दिन चर्चा में बने रहते हैं। इस बार एक खबर को लेकर पटवारी उमेश नामदेव इस कदर बौखलाए की वह सोशल मीडिया में लाइव करते हुए खुद को दलित तक बता दिया जबकि वह पिछड़ा वर्ग सेेे आते हैं। इस दौरान वह खबर को लेकर कोर्ट में जाने की बात कहते दिख रहे हैं।

बता दें कि यह वही पटवारी है जिनकी शिकायत पजरेह निवासी एक युवक ने जन सुनवाई में पहुंच इन पर गंभीर आरोप लगाए थे लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते इन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पटवारी मूल रूप से सोनवरसा सीधी का रहने वाला है। पिता सिलाई मशीन चलाकर घर का भरण-पोषण करते हैं । राजस्व विभाग के सूत्रों की मानेे तो वर्ष 2007 में उमेश नामदेव की नोकरी राजस्व विभाग में लगी । उनके पास मात्र एक एकड़ जमीन एक छोटा सा कच्चा मकान था। गांववालों का कहना है, पटवारी बनने के बाद उसने ऐसी कमाई की कि अब बैढ़न मुख्यालय में बहु मंजिला घर बना कर रह रहा है इतना ही नहीं स्कार्पियो गाड़ी की शानदार सवारी कर रहा है । फिर पटवारी के पास इतना पैसा कहां से आया यह जांच का विषय है

खुद से अधिक वेतन एवजी कर्मचारियों को बांटता है पैसा !

पटवारी उमेश नामदेव ने अपने मकान के निचले हिस्से में निजी दफ्तर खोल रखा है तो वही गनियारी में एक ऑफिस भी है । पड़ोसियों केे मुताबिक यहां सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती थी। पटवारी ने अपना कामकाज निपटाने के लिए अलग से दो कर्मचारी नियुक्त कर रखे हैं। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में उसका वेतन करीब 36 हजार रुपए मासिक है। जब की नौकरी लगने के 5 साल तक महज 10 हजार रुपए मासिक मिलता था। तू अगर वेतन का हिसाब लगाया जाए तो सम्मान में पटवारी साहब ने 13 साल की नौकरी के दौरान ₹40 लाख 56 हजार का वेतन प्राप्त किया और पचखोरा में आलीशान कोठी की कीमत लगभग ₹1 करोड़ से ज्यादा है होगी तो अब सवाल ये उठता है कि आखिर पटवारी साहब इतनी इमानदारी कहां बरती की 40 लाख के वेतन में करोड़ों की हवेली खड़ी कर ली लगता है नौकरी के दौरान और उससे पहले पटवारी साहब सिर्फ पानी पी कर ही काम चला रहे थे

सूत्रों की माने तो पैसे तो 30 से 35 हजार रुपये वह अपने खास कर्मचारी मुद्रिका सोनी उर्फ राजा सोनी सहित कर्मचारियों को बांट देता है।

अभी बीते दिनों खबरनवीस ने एक खबर छापी तो पटवारी साहब इतने बौखला गए कि सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को ईमानदारी की मिशाल बता डाला बस कसम नहीं खाई कि “मैं घूस नहीं खाता हूं” बाकी पत्रकारों के खिलाफ कोर्ट जाने की बात तक सोशल मीडिया पर कहीं जिसके बाद पटवारी साहब की कारगुजारी से एसडीएम और कलेक्टर को अवगत करा दिया गया है हालांकि सवाल अब भी यह बाकी है कि कि महज 1 एकड़ से बहु मंजिला मकान तक पटवारी साहब कैसे पहुंच गए अब देखने वाली बात यह होगी कि पटवारी साहब अब कोर्ट जाते हैं या फिर से एक बार सोशल मीडिया में लाइव होकर सीएम की कसम खाएंगे और कहेंगे कि मैं रिश्वत नहीं खाता हूं बहरहाल पटवारी साहब कुछ भी करें पर कहावत है कि सूपा बोले तो बोले चलनी क्या बोलें ….

……..आगे लोकायुक्त और धन पर नजर रखने वाले जाने

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RED MOMENTS STUDIO

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