सीधी-सिंगरौली

singrauli ये पटवारी सब पर भारी ! बिना दाम नहीं होता कोई काम ?

सिंगरौली 31 अक्टूबर | जिला मुख्यालय में पटवारियों से नामांतरण कराना व खतौनी कटवाना आसान काम नहीं है। यहां पटवारी द्वारा खुलेआम तहसीलदार के नाम पर 10 से 20 हजार रूपये की मांग की जाती है। तहसीलदार और कलेक्टर कार्यालय से ज्यादा पेंडेंसी पटवारी कार्यालय में है। बिना पैसे के यहां कोई काम नहीं होता।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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सरकार कोई भी हो लेकिन राजस्व विभाग में भ्रष्टचार व घूसखोरी में नियंत्रण होने की उम्मीद लोगों को बिल्कुल भी नहीं है, सरकार भी इस पर रोक नहीं लग सकी है। खासकर पटवारियों से लोग ज्यादा परेशान हैं। कोई भी काम बिना लेन देन के नहीं होता। बैढ़न स्थित पटवारी कार्यालय में यह नजारा खुलेआम देखा जा सकता है। यहां पटवारी का ज्यादातर काम उनका कोटवार करता है। उनका रूतबा भी किसी से कम नहीं है। भू अभिलेख और महत्वपूर्ण दस्तावेज पटवारी के बजाय कोटवार के देखरेख में ज्यादा होता है।

5 से 10 हजार रूपये रेट फिक्स
जमीन का नपाई हो या नक्शा बनाने का काम, नामांतरण हो या रिकार्ड दुरूस्त करने का काम हर कार्य के लिए तीन से पांच हजार रूपये तक का रेट बंधा हुआ है। पटवारी द्वारा स्पष्ट कहा जाता है कि तहसीलदार 5 से 10 हजार रूपये बिना हस्ताक्षर नहीं करते। नई पर्ची बनाने के लिए लोगों को पांच हजार रूपये देना पड़ता है, जबकि इस किसान किताब की कीमत मात्र 5 रूपये है।

जमीन दलाल मनर्जी दे रहे पैसा
जमीन दलाल अपनी मर्जी मुताबिक काम कराने के लिए पटवारियों को मनचाहा कीमत दे देते हैं, इसलिए उनका काम पहले होता है। जबकि आम लोग महीनों चक्कर काटते हैं, लेकिन उनका काम नहीं होता। लिहाजा कलेक्टर के जनदर्शन में ऐसी शिकायतें ज्यादा पहुंचती हैं, अगर ये मामूली काम आसानी से हो जाए तो लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। बैढन पटवारी के ऊपर एक बड़े नेता का हाथ होने की वजह से अधिकारियों का बिल्कुल भी डर नहीं है।

सैकड़ों स्टाम्प नामांतरण के लिए धूल खाते पड़े
नगर वासियों ने आरोप लगाया कि पटवारी द्वारा सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा जैसे कामों के लिए सभी से 10 से 20 हजार रुपए मांगे जाते हैं। नहीं देने पर काम नहीं किया जाता और बदसलूकी भी की जाती है। जब से पटवारी पदस्थ हुआ है तब से बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करता। पटवारी के खिलाफ नगर वासियों में बेहद आक्रोश है।जिला मुख्यालय के पटवारी कार्यालय में सैकड़ों स्टाम्प नामांतरण के लिए धूल खाते पड़े हैं, मगर अधिक राशि देकर काम कराने वालों का काम ही यहां हो रहा है। जिसके चलते सीधे साधे व ईमानदारी से काम कराने वालों को चक्कर काटना पड़ रहा है।

कोटवार बना पटवारी
जिला मुख्यालय में पटवारी के ज्यादातर कार्यों को कोटवार ही करता है। मदद करना अच्छी बात है मगर भू राजस्व के महत्वपूर्ण दस्तावेज इसके हाथ में होता है। बिना पटवारी के जमीन की नाप करने भी वह कहीं भी चला जाता है और नाप के लिए 10 से 20 हजार रूपये तक लेता है। इतना ही नहीं पहले राशि जमा करने के बाद ही नाप करने की बात खुलेआम कही जाती है, जबकि कोटवार पटवारी के साथ में रह सकता है। उसकी मदद कर सकता है मगर यहां खुलेआम रिश्वत की मांग की जाती है। अगर अनाधिकृत व्यक्तियों पर इस तरह मनमानी करने की रोक लगे तो लोगों को राहत मिलेगी, मगर इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

10 से 20 हजार रुपए मांगते पटवारी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बैढ़न पटवारी को नगर निगम क्षेत्र के बैढ़न,गनियारी, देवरा बार्ड अधिकार क्षेत्र में आता है लेकिन पटवारी द्वारा सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा जैसे कामों के लिए ग्रामीणों से 10 से 20 हजार रुपए मांगे जाते हैं। नहीं देने पर काम नहीं किया जाता और बदसलूकी भी की जाती है। जब से पटवारी पदस्थ हुआ है तब से बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करता। पटवारी के खिलाफ गांव में बेहद आक्रोश है।

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