FEATUREDसीधी-सिंगरौली

सीधी में बेटी ने पिता को मुखाग्नि देकर किया अंतिम संस्कार

सीधी 30 अक्टूबर । जहां आज समाज में बेटी को भी बेटे के समान का दर्जा दिया जा रहा है वही बेटियां भी अपना फर्ज निभाने में पीछे नहीं हट रही है और हर वो फर्ज अदा कर रही है जो एक बेटा अदा करता है। सीधी के लालता चौराहे के रहने बाले देवी दीन सोनी की छोटी बेटी चाँदनी सोनी ने भी अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने पिता को मुखाग्नि देकर बेटे के सामान अपना फर्ज निभाया और समाज के लिये मिसाल पेश की।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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सीधी की चाँदनी ने अपने परिवार में पूरा की बेटे की कमी लालता चौक पुराने बस स्टेंड निवासी देवी दीन सोनी जो लंबे समय से बीमार चल रहे थे,जिसे परिवार जनों द्वारा उपचार के लिये बनारस में भर्ती कराया था,जहां चिकित्सकों द्वारा ठीक तरह से तितमेंट नही किया गया बल्कि कोरोना का हबला देकर देवी दीन सोनी की छुट्टी कर दी,जहां से सीधी पहुँचने से पहले ही देवी दीन की रास्ते मे ही मौत हो गाई,परिवार जनों की मौत की खबर लगते ही मनो पहाड़ सा टूटू पड़ा क्योंकि देवी दिन शहर में एक बिशखाना की छोटी दुकान चलकर अपने परिवाजनों का भरण पोषण कर रहे थे

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देवी दिन के परिवार में दो बेटी बस थी जिसमे बड़ी बेटी रोशनी और सबसे लाडली बेटी चाँदनी थी जिसे वह हमेशा बेटा ही मान रहे थे, वही मृतक देवी दीन की बड़ी बेटी की शादी की तैयारी कर रहे थे कि उसी बीच उन्हें बीमारी ने जकड़ लिया उपचार करने गाये तो चिकित्सकों ने भी कोरोना का हबला देकर प्रथमिक उपचार के बाद छुट्टी कर दी, रास्ते मे आते समय उनकी मौत हो गाई, मृतक का पार्थिव शरीर से जब घर लेकर पहुंचे तो उनके चिता को मुखाग्नि देने वाला घर में कोई बेटा नहीं था जिस पर चांदनी ने हिम्मत बांधी और अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देकर बेटी होते हुये भी बेटा होने का फर्ज अदा कर समाज के लिए एक मिसाल पेश की।

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इतना ही नही बेटी चाँदनी हर वह फर्जी अदा कर रही है जो मृतक के अंतिम संस्कार के बाद हिंदू रीति रिवाज में परंपरा चली आ रही है,पिता की चिता को मुखाग्नि देने निकली इस बेटी को देखकर अंतिम संस्कार में शामिल लोगों की आंखें भर आईं। सोनी के परिवार में बेटे नहीं होने से पुत्र की सभी जिम्मेदारियां चाँदनी ने उठाई और अंतिम संस्कार के समय पिता के चिता को आग देकर चली आ रही सभी परंपराओं का जिम्मेदारी से निर्वहन कर रही है

बेटी की इस हिम्मत को देखकर समाजजनों ने भी उसे ढांढस बंधाने के साथ ही उसकी हिम्मत पर पीठ भी थपथपा रहे हैं,वही चाँदनी का कहना है की हमारे समाज में बेटी और बेटा को लेकर भेदभाव करने बालों को मेरे एक ही सन्देश है कि आग की युग की बेटियां किसी बेटे से कम नही है।

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