सतना

शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में सांस्कृतिक संध्या ‘शरदोत्सव’ का आयोजन स्थगित

सतना 29 अक्टूबर। नानाजी के जन्मदिवस शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में होने वाली सांस्कृतिक संध्या ‘शरदोत्सव’ का आयोजन कोरोना के चलते हुआ स्थगित सादगी पूर्ण तरीक़े से आयोजित होंगे कार्यक्रम, स्वावलम्बन केन्द्रों पर ग्रामवासी करेंगे अलग-अलग आयोजन चित्रकूट के विकास को कई आयामों के साथ जोड़कर दुनियां को स्वावलंबन का संदेश देने वाले ‘विराट पुरुष नानाजी’ का शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था जन्म

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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11 अक्टूबर 1916 को शरद पूर्णिमा की रात महाराष्ट्र के परभणी जिले के हिंगोली तालुका के कडोली नामक छोटे से गांव में अमृतराव देशमुख की धर्मपत्नी राजा बाई की कोख से देश-दुनिया को स्वावलंबन का संदेश देने वाले दीनदयाल शोध संस्थान के संस्थापक भारत रत्न नानाजी देशमुख का जन्म हुआ था। शरद पूर्णिमा के दिन चाँद अपनी पूर्ण आभा बिखेरता है।हम सब इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। यह दिन हम सबके लिए ढेरों विशेषताएँ लिए आता है। 104 वर्ष पूर्व भी शरद पूर्णिमा का दिन हम सबके लिए एक विशेष उपहार लेकर आया था, एक अनमोल रत्न, नानाजी। चित्रकूट के अलावा देश भर के कई स्थानों एवं दुनियां में भी कई भागों में नानाजी को मानने वाले लोग उनके जन्मदिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाते आए हैं। आगामी 30 अक्तूबर, शुक्रवार को शरद पूर्णिमा है। उनके स्वर्गवास के पश्चात से प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में विशाल स्तर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है।

इस वर्ष भी ऐसी ही योजना थी, परन्तु कोरोना महामारी के चलते शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में होने वाली सांस्कृतिक संध्या ‘शरदोत्सव’ का आयोजन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के सभी प्रकल्पों सहित पांच सौ से भी अधिक ग्राम आबादियों सहित कई जगह सादगी पूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आसपास गांव में ग्रामवासी कोरोना गाइडलाइन का पालन हुए नानाजी के जयंती अवसर पर शरद पूर्णिमा के दिन 30 अक्टूबर को अपने-अपने स्तर से कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। नानाजी के प्रति स्थानीय लोगों में जिस प्रकार की प्रगाढ़ आस्था है उस हिसाब से उनके जयंती पर कार्यक्रम के निमित्त हजारों की संख्या में लोगों का एकत्रित होना आम बात है। उसको ध्यान में रखकर सामूहिक रूप से वृहद कार्यक्रम की योजना ना करते हुए कोरोना नियमावली का पालन करते हुए अलग-अलग स्थानों एवं ग्रामों में नानाजी का जयंती पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

 

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