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singrauli news हड्डा कीट के डंक से दो मासूमों की गई जान, दो बच्चियों की हालत नाजुक

सिंगरौली 24 सितम्बर। अधिकांश यही सुनने व जानने की खबरें मिलती रहीं कि मधुमक्खियों के डंक से व्यक्ति की मौत हो जाती है। किन्तु चितरंगी थाना क्षेत्र के ग्राम बोदाखुटा में हड्डा कीटों के काटने से दो मासूम बालकों की मौत हो गयी, जबकि दो मासूम बालिकाएं जिला चिकित्सालय में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। यह घटना बुधवार की सुबह करीब 10 बजे की बतायी जा रही है। उक्त बच्चे मवेशी व बकरियों को लेकर जंगल चराने गये हुए थे।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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जानकारी के मुताबिक ग्राम बोदाखुटा के चार मासूम बालक रोजाना की तरह बुधवार की सुबह बकरियों को लेकर जंगल में चराने गये हुए थे। जहां सबसे पहले हड्डा कीटों ने वृद्ध व्यक्ति पर हमला किये। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग खड़ा हुआ। लेकिर हड्डा कीटों के चपेट में चार मासूम आ गये। जहां दो मासूम बच्चियां झाडिय़ों में छुपकर किसी तरह बची रहीं, लेकिन इन्हें भी हड्डा कीटों ने खूब डंक मारा। तो वहीं दो मासूम विकल्प पिता बाबूलाल सिंह उम्र 6 वर्ष, रमेश पिता श्याम बहादुर सिंह उम्र 5 वर्ष इधर-उधर चीख-पुकार कर अपनी जान बचाने के लिए भागते रहे। अंतत: इन दोनों मासूम बालकों के शरीर पर हड्डा कीट इस तरह से चिपके हुए थे कि देखने वाले भी डर गये। यह घटना करीब सुबह 10 बजे की है। मासूम बच्चों के परिजनों को इसकी जानकारी दोपहर 12 बजे लगी बच्चों के बाप चितरंगी में मजदूरी करने आये थे।

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खबर मिलते ही आनन-फानन में बोदाखुटा जंगल में पहुंच तलाश करने लगे। दो बच्चियां आरती पिता हरीराम बादी उम्र 6 वर्ष एवं प्रियंका पिता बाबूलाल उम्र 7 वर्ष झाड़ी में छुपी मिलीं, लेकिन उनकी हालत देखकर तत्काल अस्पताल रवाना कर दिये। जहां चिकित्सकों ने दोनों मासूम बच्चियों को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया तो वहीं मासूम बालक विकल्प व रमेश को जंगल के झाडिय़ों में गांव भर के लोग तलाश करने लगे। बड़ी मुश्किल से दोनों मासूम घायल हालत में मिले। लेकिन इनके शरीर, आंख, नाक,कान, ओठ सहित अन्य भागों में हड्डा कीट छत्ता की तरह लिपटे हुए थे। ग्रामीणों के कड़े मशक्कत के बाद सैकड़ों की संख्या में चिपके हड्डा कीटों को भगाने में सफल हुए। आगे बताया गया कि दोनों मासूम बालकों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के कुछ देर बाद दोनों मासूमों ने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना पर चितरंगी पुलिस मौके से पहुंच शव का पोस्टमार्टम करा अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।

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गाय व बकरियों के चिल्लाहट से मिला संकेत

ग्रामीणों के अनुसार हड्डा कीटों ने मासूम बालकों के साथ-साथ जंगल में चरने गयी बकरी व गायों को भी निशाना बनाया। गाय व बकरियां भी अपनी जान बचाकर जंगल से अपने-अपने घरों की ओर चिल्लाहट करते हुए भागने लगीं। पहले लोग समझ नहीं पाये, लेकिन मासूम के बाबा ने बताया कि हो सकता है कि हड्डा कीट हमला बोले हों। वृद्ध चरवाहे को भी हड्डा कीटों ने डंक मारा था। वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा, लेकिन उसके रिश्ते के दो पोतों की मौत हो गयी। जबकि दो बालिकाएं जीवन और मौत के बीच सांसें गिन रही हैं।

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जंगल में चीख-पुकार करते रहे मासूम

बोदाखुटा के जंगल में जिस वक्त हड्डा कीटों ने मासूमों पर हमला बोल दिया जहां मासूम बालक व बालिकाएं रिश्ते में भाई-बहन जान बचाने के लिए इधर-उधर पतझड़ों में छुपते रहे और चीख-पुकार करते रहे। लेकिन जंगल घरों से दूर होने के कारण कोई व्यक्ति बचाव के लिए जंगल में नहीं जा पाये। जिस वक्त मासूम बच्चों के परिजन जंगल में तलाश करने पहुंचे उस नजारे को देखकर हर सख्स के रोंगटे खड़े हो गये। दिल को दहलाने वाली घटना को देख अस्पताल चितरंगी में भी लोग पहुंचने लगे और मासूमों के चीख-पुकार व मौत को देख अपने आंसुओं को नहीं रोक रोक पाये।

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