FEATUREDसीधी-सिंगरौली

डीईओ पर प्राचार्य ने लगाया है गंभीर आरोप, अजजा आयोग जांच टीम के सामने पेश हुए डीईओ व प्राचार्य

सिंगरौली 18 सितम्बर। अनुसूचित जनजाति आयोग की दो सदस्यीय जांच टीम आज गुरूवार को जिला मुख्यालय बैढऩ पहुंची। जहां डीईओ बृजेश मिश्रा व धानी हाई स्कूल के प्राचार्य नवल सिंह समेत दो अन्य शिक्षकों को तलब कर लेखबद्ध जबाव लिये गये।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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गौरतलब हो कि शासकीय हाई स्कूल धानी के प्राचार्य नवल सिंह मार्के ने 15 नवम्बर 2019 को राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग भोपाल सहित कलेक्टर, एसपी व हरिजन थाने में लिखित सूचना व शिकायत करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बृजेश मिश्रा व दो अन्य अध्यापक व तत्कालीन प्राचार्य पर मानसिक रूप से प्रताडि़त करने, जातिसूचक गाली-गलौज करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई किये जाने की मांग की गयी थी। प्राचार्य का आरोप है कि कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक तथा हरिजन थाने के द्वारा डीईओ के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी। बल्कि आरोप है कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक टीके विद्यार्थी ने डीईओ पर दरियादिली दिखाया था।

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इधर अध्यक्ष राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग भोपाल के द्वारा उक्त मामले की जांच के लिए डाइट प्राचार्य सतना के नीरज दीक्षित की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित किया गया था। तकरीबन 5 महीने बाद आयोग की दो सदस्यीय जांच टीम आज गुरूवार को सतना डाइट प्राचार्य नीरज दीक्षित के अगुवाई में पहुंची। सूत्र बताते हैं कि जांच टीम ने उभयपक्षों का लेखबद्ध बयान लिये गये हैं। प्राचार्य नवल सिंह मार्के ने अपने जबाव में डीईओ समेत दो अन्य अध्यापकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मय दस्तावेज के साथ जबाव दिया है। फिलहाल आदिवासी प्राचार्य के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी समेत दो अन्य अध्यापकों पर लगाये गये गंभीर आरोप का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। अब देखना है कि राज्य अजजा आयोग की टीम डीईओ पर क्या एक्शन लेती है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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जांच टीम ने मांगा था 8 बिंदुओं पर जबाव

राज्य अजजा आयोग की जांच टीम ने आदिवासी प्राचार्य के द्वारा लगाये गये करीब 8 बिंदुओं पर जबाव मांगा था। जिसमें प्राचार्य ने बताया कि उनके पदस्थापना के पूर्व धानी स्कूल कक्षा 10 वीं का परीक्षा परिणाम 4.16 प्रतिशत था। बाद में यह प्रतिशत 41.8 हो गया। वहीं बर्दी का अतिरिक्त प्राचार्य प्रभार के बारे में भी अवगत कराया और कहा कि मैंने इसके लिए कोई अनुरोध व आवेदन डीईओ के यहां नहीं किया था। साथ ही फीस वसूली समेत अन्य सवालों का ठोस प्रमाणों के साथ जबाव प्रस्तुत किया है और कहा है कि डीईओ ने दो अध्यापकों को संरक्षण देते हुए मेरे साथ गाली-गलौज व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है। जिसकी लिखित शिकायत कार्रवाई के लिए कलेक्टर, एसपी, अजाक थाने में किया गया था।

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