FEATUREDमध्यप्रदेश

आओ खायें मध्यप्रदेश … पार्ट 2

सरकार बदल जाने भर से , सवालात नही बदलते है ,
चेहरे बदल जाने भर से ,
हालात नही बदलते है ,
वजह फकत इतनी है कि
नेताओं के ख्यालात नही बदलते है ।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब तबके के लोगों को अमानक स्तर के चावल के वितरण किये जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है हालांकि जब तक पकड़े नही गये थे तब तक तो सब कुछ ठीक ही था लेकिन जैसे ही केन्द्रीय जांच दल के लोगो ने इस मामले मे दखल दी सत्ता की रबड़ी जीम रहे लोगों के चेहरों से चमक गायब हो गई घोटालो के उजागर होने के बाद अमूमन जैसा होता आया है वैसा ही हुआ

आओ खाये मध्यप्रदेश
आओ खाये मध्यप्रदेश

शिवराज सरकार हरकत मे आ गई और बी जे पी कांग्रेस पर हमलावर हो गई कहा जाने लगा कि कमलनाथ सरकार के द्वारा घटिया चावल की खरीद फरोख्त हुई थी जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुये बीजेपी से पूछ लिया कि यदि कमलनाथ जहर खरीद लेते तो क्या शिवराज उसे भी गरीबो मे बंटवा देते ? खैर पिछले तीन दिनो से बीजेपी के लोग घटिया चावल वितरित किये जाने के मामले मे घटिया तरीके से अपना बचाव करते हुये नजर आ रहें है जबकि उधर कांग्रेस इसे उपचुनावों मे एक बड़ा इश्यु बनाने की तैयारी मे है हालांकि प्रदेश की राजनीति मे इस तरह के गोरख धंधे होते पहले भी रहें है और इसके बावजूद लोग चुने जाते रहे है

आओ खाये मध्यप्रदेश
आओ खाये मध्यप्रदेश

जहां तक मुझे याद आता है कि मध्यप्रदेश मे सबसे पहले आनाज से संबंधित गुलाबी चना कांड जैसा घोटाला हुआ था इस मामले मे तबके मुख्य मंत्री पंडित द्वारका प्रसाद मिश्रा का नाम सामने आया था दूसरा बड़ा मामला मेडिकल कालेज मे दाखिले को लेकर सामने आया था इसमे गड़बडिय़ों को लेकर श्यामाचरण शुक्ल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था आपात काल के दौरान एक शक्कर की बड़ी खेप लेकर निकली पूरी की पूरी एक रैक गायब हो गई थी तब शक की सुई विद्या भैया की तरफ घूमी थी चुरहट लाटरी कांड और आसवनी कांड मे कुंवर अर्जुन सिंह निशाने पर रहे थे खराब सड़को के लिये दिग्गी राज मे हुई व्यापक गड़बडियो को जिम्मेदार माना गया था 2004 मे रेत के कारोबार मे माफिया की एंट्री के लिया उमा भारती के भाई भतीजों का नाम सुर्खियों मे रहा था और फिर मामा राज मे हुये व्यापम घोटाले ने तो एक बड़ा इतिहास ही रच दिया था पचास से ज्यादा मौतौं की असली वजह आज तक किसी को पता नही है

आओ खाये मध्यप्रदेश
आओ खाये मध्यप्रदेश

अंत मे इस तरह के तमाम गोरखधंधो के बीच सवाल यह उठता है कि आखिर घोटालों और घूंस खाने का लाईसेंस देता कौन है ? क्या इसके लिये वो लोग जिम्मेदार है जिन्हे आपने चुना है और यही वो चंद लोग हैं जो बहुमत का लबादा ओढकर सरकार बना लेते है और बाद मे घूंस खाने का परमिट जारी करते रहते है ? सवाल बेहद गंभीर है मगर जवाब देने के मामले मे कहीं कोई गंभीर नही है संभवतः नीचे से लेकर ऊपर तक बैठे अधिकांश लोग भ्रष्ट व्यवस्था से संतुष्ट है ।

यकीन करना थोड़ा मुश्किल होगा मगर सच्चाई यह है कि पटवारी के भ्रष्टाचार से तहसीलदार और कलेक्टर साहब खुश है तो उधर थाने के मुंशी के भ्रष्टाचार से इलाके के टी आई और एस डी ओ पी साहब प्रसन्न नजर आते है जबकि आर टी ओ से परिवहन आयुक्त और गृह मंत्री जी पूरी तरह से संतुष्ट नजर आयेंगे तो उधर नगरनिगम के काले पीले कारनामो से नगरीय प्रशासन मंत्री और निगमायुक्त जी भी गदगद् अवस्था मे प्राप्त हो जायेंगे। ऐसे मे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब भ्रष्टाचार के स्वीमिंग पूल मे सारे के सारे लोग दिगंबरी स्नान कर रहे है तब उमंग सिंगार अकेले दिग्गी राजा के भ्रष्ट चरित्र की चर्चा क्यों कर रहे थे ?

अंत मे चलते -चलते

पैसा कहाँ से आयेगा ?
यह मत सोचो
बस रास्ता खोजो ।

रास्ता तुम्हें
कहाँ ले जायेगा
यह भी मत सोचो
बस
आंख मीचकर इसके पीछे दौड़ो

सेंध लगाओ ,
घूंस खाओ
डीजल मे मिट्टी का तेल मिलाओ
मौका लगे तो
चुनाव लड़ जाओ
शर्म हया से मत घबराओ
बस पैसा कमाओ ।

पैसा शोहरत है
सोहबत है
मुहब्बत है
पैसा ही तो ईमान है …

इसलिये इसी के बारे मे सोचो
और धन.कमाने का
कोई एक जरिया खोजो – – –

अतः
आओ खायें मध्यप्रदेश

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RED MOMENTS STUDIO

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