FEATUREDसीधी-सिंगरौली

संभागी कमिश्नर की मीटिंग में पहुंचे एक जिले से दो सीएमएचओ

सिंगरौली 28 अगस्त। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद को लेकर गहमा गहमी का माहौल है। करीब 96 घण्टे बाद भी यह तय नहीं हो पाया कि सिंगरौली का सीएमएचओ कौन है? दो दिन से बनी संशय की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य कर्मी भी पशोपेश में हैं। वहीं आज गुरूवार को रीवा मुख्यालय में संभागायुक्त ने संभाग भर के सभी सीएमएचओ की बैठक लिये थे। जिसमें दोनों सीएमएचओ ने शिरकत किया है।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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गौरतलब हो कि 28 जुलाई को उप सचिव, म.प्र.शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भोपाल के यहां से एक आदेश करीब 25 दिन बाद डाक से सीएमएचओ दफ्तर पहुंचा। डाक पत्र खुलते ही इस बात की जब भनक लगी कि सीएमएचओ डॉ.आरपी पटेल को पदोन्नति करते हुए उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा पदस्थ करते हुए जिला चिकित्सालय में पदस्थ पैथालॉजिस्ट चिकित्सक डॉ.एनके जैन को प्रभारी सीएमएचओ बनाया गया है। आदेश पत्र मिलने के दूसरे दिन बाद डॉ.एनके जैन ने कलेक्टर मौखिक निर्देश पर सीएमएचओ का पदभार ग्रहण कर लिया और दो दिन तक कामकाज करते रहे। इस दौरान सीएमएचओ डॉ.आरपी पटेल भारमुक्त नहीं हुए थे। तीसरे दिन बुधवार को नया घटनाक्रम सामने आया जहां सीएमएचओ की कुर्सी पर डॉ.आरपी पटेल विराजमान थे। इस दृश्य को देख सीएमएचओ डॉ.एनके जैन भी हैरान हो गये और उन्होंने तत्काल कलेक्टर के यहां पहुंच स्थिति से अवगत कराया।

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वहीं सीएमएचओ डॉ.आरपी पटेल भी इस बात के लिए अड़े हैं कि डॉ.एनके जैन को जब जिला चिकित्सालय से रिलीव मैने नहीं किया तो वे सीएमएचओ का प्रभार कैसे ग्रहण कर लिये। डॉ.पटेल के पास सिविल सर्जन का भी अतिरिक्त प्रभार है। बुधवार को पूरे दिन स्वास्थ्य कर्मियों में दो सीएमएचओ को लेकर खूब चर्चाएं हो रही थीं। वहीं स्वास्थ्य कर्मी भी पशोपेश में हैं कि सरकारी फाइलों में किससे हस्ताक्षर करायें। फिलहाल डॉ.आरपी पटेल का स्थानांतरण करने संबंधी कोई आदेश भी नहीं आया है। बावजूद इसके वे अपने आपको सीएमएचओ मान रहे हैं। तो वहंी डॉ.एनके जैन भी उप सचिव के पत्र का हवाला देकर सीएमएचओ के पद पर काबिज हैं। अब दो सीएमएचओ की लड़ाई में कोरोना जैसे महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को जुझना पड़ रहा है।

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दोनों सीएमएचओ पहुंचे रीवा बैठक में
जानकारी के मुताबिक गुरूवार को रीवा मुख्यालय में संभागायुक्त ने संभाग भर के समस्त कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डिप्टी डायरेक्टर एवं ज्वाइंट डायरेक्टर स्वास्थ्य, सीएमएचओ सहित अन्य अधिकारियों की बैठक कोरोना वायरस से निपटने व विकास के प्रगति के संबंध में समीक्षा बैठक बुलायी गयी थी। जहां सिंगरौली के दोनों मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शिरकत किये। हैरानी की बात थी कि बैठक में सिंगरौली सीएमएचओ को लेकर संभागायुक्त ने चर्चा भी किया, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। इधर रीवा की बैठक में शामिल होने के लिए पुराने जिला चिकित्सालय में दोनों सीएमएचओ के बीच तीखी बहस भी हुई। जानकारी अपडेट को लेकर आपरेटर से दोनों सीएमएचओ फाइल मांग रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों में कहा-सुनी हुई अंतत: मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो उन्होंने दोनों सीएमएचओ से बात किये फिर भी दोनों सीएमएचओ बैठक में शरीक हो गये।

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पशोपेश में हैं स्वास्थ्य कर्मचारी
दो सीएमएचओ के पद को लेकर सीएमएचओ व सिविल सर्जन दफ्तर के स्वास्थ्य कर्मचारी पशो पेश में हैं। अब हालत यह है कि दोनों अधिकारियों से स्वास्थ्य कर्मी छुप कर निकलने की कोशिश में रहते हैं ताकि किसी की नजर न पड़े। वहीं सीएमएचओ कुर्सी को लेकर मचे घमासान से अब इस बात की भी स्वास्थ्य महकमे में चर्चा है कि जब डॉ.आरपी पटेल का स्थानांतरण निरस्त करने संबंधी कोई आदेश भोपाल से नहीं आया तो वे अभी तक सिंगरौली का मोहमाया क्यों नहीं छोड़ रहे हैं। मोहमाया न छोडऩे के पीछे क्या कारण है? कहीं डीएमएफ फण्ड से जोड़कर देखा जाने लगा है।

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कोविड-19 एक बहाना तो नहीं
कलेक्टर ने कोविड-19 का हवाला देकर डॉ.आरपी पटेल को यथावत बने रहने के लिए कह तो दिया है, लेकिन प्रदेश सत्ताधारी भाजपा के क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि कोविड के समय प्रदेश भर में दो दर्जन से ज्यादा सीएमएचओ की अदला बदली हुई है। तो वहीं कई कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार भी बदले जा चुके हैं और यह सब कोरोना के संक्रमण काल में हुआ है। अब कलेक्टर का यह तर्क है कि कोरोना के चलते किसी चिकित्सक को भारमुक्त नहीं किया जा रहा है। फिर यही जनप्रतिनिधि सवाल कर रहे हैं कि भोपाल से डॉ.आरपी पटेल का स्थानांतरण क्यों हुआ। हालांकि इसका ठोस जबाव भी जिला प्रशासन के पास नहीं है। वहीं यह भी चर्चा है कि कोविड-19 के दौरान सीएमएचओ डॉ.आरपी पटेल ने कोई ऐसा उपलब्धि भरा कार्य नहीं किया है जो ईनाम के पात्र हो, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी पर है और खण्ड स्तर के कई चिकित्सक बेलगाम हैं जिन पर सीएमएचओ का खुला संरक्षण है और यहां तक आरोप है कि कायाकल्प की राशि में जमकर बंदरबांट हुई है।

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स्थानांतरण निरस्त कराने भर रहे दम
सूत्रों के मुताबिक डॉ.आरपी पटेल का सिंगरौली से मोह ममता नहीं छूट रही है। दो दिन पहले तक उन्होंने सिंगरौली से जाने के लिए मन बनाया था ऐसी चर्चाएं हैं, लेकिन अचानक उनका मन कैसे बदल गया यह बात लोगों के गले से नहंी उतर रही है। वहीं चर्चा है कि वे भोपाल के विभागीय आकाओं से हौसला मिला है। जिसके चलते वे दम भर रहे हैं कि वे सेवानिवृत्त होने तक सिंगरौली के सीएमएचओ बने रहेंगे। भोपाल से कौन संरक्षण दे रहा है धीरे-धीरे ऐसे स्वास्थ्य अधिकारी भी बेपर्दा होंगे। फिलहाल स्थानांतरण निरस्त कराने संबंधी भोपाल से कोई पत्र अभी तक सिंगरौली नहीं आया है।

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