FEATUREDसीधी-सिंगरौली

सत्तू वितरण में गड़बड़झाला,साझा चूल्हा समूह को लाभ पहुंचाने शुरू हुई कवायद

सिंगरौली 28 अगस्त। महिला बाल विकास सिंगरौली में इन दिनो भर्रेशाही का आलम इस कदर व्याप्त है कि कार्यकर्ता परेशान हाल है। बिना कमीशन कोई भी कार्य नही हो रहा है। जुलाई माह में सत्तू का वितरण नही हुआ है। इसके बावजूद कार्यकर्ताओ पर दबाव बनाकर सुपरवाईजर वितरण होने का मासिक रिपोर्ट तैयार करवा रहे है। जिसका एक आडियो भी इन दिनो सामना आ रहा है।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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गौरतलब हो कि महिला बाल विकास सिंगरौली में जब से डीपीओ के रूप में प्रवेश मिश्रा की पदस्थापना हुई है तब से महिला बाल विकास में अंधेरगर्दी का आलम इस कदर व्याप्त है कि हर कोई हर योजना में लाभ देकर कमीशन खाने का कार्य कर रहा है। नाम न छापने की शर्त पर इन अधिकारियो से परेशान होकर कार्यकर्ताओ ने कई ऐसे राज खोला है जो सुपरवाईजर से लेकर परियोजना अधिकारी व डीपीओ के कार्यप्रणाली पर दाग लग रहा है। आरोप में यह भी कहा गया है कि चितरंगी,देवसर व सिंगरौली विकासखण्ड में डीपीओ के द्वारा परियोजनाओं व सुपरवाईजरो पर धौंस दिखाकर अपने चहेतो को लाभ दिया जा रहा है।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओ का भले ही प्रचार-प्रसार न किया जा रहा हो लेकिन उसके बदले में अपने दो चहेतो को लाभ देने में डीपीओ कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है। ऐसा ही एक मामला इन दिनो सुर्खियो में छाया हुआ है। जहां एक महिला बाल विकास की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता किसी से फोन पर बात कर रही है और कह रही है कि जुलाई महीने में विभाग की ओर से यह निर्देश दिया गया था कि सत्तू का वितरण गर्भवती महिलाओं व जीरो से तीन वर्ष के बच्चो को देना है। लेकिन जुलाई माह में केन्द्रो में सेत्तु आया ही नही।

इसके बावजूद सुपरवाईजरो के द्वारा दबाव बनाया जा रहा है कि जो प्रगति रिपोर्ट व मासिक रिपोर्ट बनती है उसमें यह दर्शाना है कि जुलाई माह में सत्तू का वितरण किया गया है। अगर ऐसा नही करोगी तो तुम लोग जानना। इस तरह के धमकी भरे शब्द सुपरवाईजरो के द्वारा कार्यकर्ताओं को दिये जा रहे है। इसके पीछे की जो कहानी है वह यह है कि जो रिपोर्ट कार्यकर्ता तैयार करेंगी उसी रिपोर्ट के आधार पर समूह के खाते में सत्तू का बजट आयेगा और इस बजट में समूह के साथ-साथ अधिकारी व कर्मचारियों का कमीशन बनेगा। इस तरह के आरोप लगाये जा रहे है और जो आडियो है वह भी कहीं न कहीं इसी संदेह को जाहिर कर रहा है। फिलहाल सत्तू वितरण के नाम पर जारी गड़बड़झाला को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं।

अब डीपीओ पर भी लग रहे आरोप
महिला बाल विकास विभाग में चल रही अंधेरगर्दी पर एक आडियो भी सामने आया है। इस आडियो में खुलेआम कार्यकर्ता यह कह रही है कि ये सब कुछ जो हो रहा है वह तो सब डीपीओ के ईशारे पर किया जा रहा है। जिस तरह से डीपीओ निर्देश देते हैं उसी तरीके से सुपरवाईजर क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाकर कार्य कराती है। चाहे वह कार्य सही हो या गलत हो। डीपीओ पर आरोप लग रहे हैं उसमें कहीं न कहीं सच्चाई तो होगी तभी इस तरह से कार्यकर्ता खुलकर अधिकारी के खिलाफ आवाज उठा रही है और इसका जीता जागता उदाहरण इन दिनो महिला बाल विकास विभाग में देखने को मिल भी रहा है। जहां कई तरह के आरोप लगाये जा रहे है। इसके बावजूद अपनी कार्यप्रणाली में अधिकारी सुधार नही कर पा रहे है।

साझा चूल्हा के खाते में आना था पैसा
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ की बात माने तो जुलाई माह में जो सत्तू का वितरण होना था वह तो हुआ नही क्योंकि केन्द्रो में सेतु पहुंचा ही नही। इस तरह के मामले ज्यादातर देवसर परियोजना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं पर सुपरवाईजर आखिर क्यों दबाव बना रही है। यह सत्तू साझा चूल्हा के माध्यम से देना था। जब वितरण ही नही हुआ तो कार्यकर्ता किस आधार पर यह लिखकर दे दें कि वितरण साझा चूल्हा के माध्यम से किया गया है। फिर भी दबाव बनाकर सुपरवाईजर जबरन लिखा रही है। क्योंकि साझा चूल्हा चलाने वाले समूहों के खाते में यह पैसा आयेगा और इस पैसे से जहां चहेते लाभ लेंगे वहीं अधिकारी भी मालामाल होंगे। यही कारण है कि दबाव बनाकर जुलाई माह में सेत्तु आने की बात की रिपोर्ट तैयार करायी जा रही है।

इनका कहना है
जिले में जुलाई माह में वितरण किया गया है,जो आरोप लगाये जा रहे हैं वह गलत है। जहां से शिकायत मिलती है उसकी जांच अवश्य करायी जाती है किसी केन्द्र का नाम बताया जाय तो अवश्य जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी।
प्रवेश मिश्रा
डीपीओ सिंगरौली

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