FEATUREDमध्यप्रदेश

लोकपाल या फिर जोक पाल …

आलेख, अशोक शुक्ला “चौकन्ना” वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार……

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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मध्य प्रदेश मे मंत्रीमंडल के गठन के बाद कथित मलाई दार पदो को लेकर मची खींचतान से यह तो जाहिर हो गया है कि ले देकर राजनीति का एकमात्र आकर्षण करप्शन ( corruption ) है ।

हालांकि इस तरह के करप्शनो पर नजर रखने के लिये एक सशक्त लोकपाल की जरूरत महसूस की गई थी और 2013 मे अन्ना ( Kisan Baburao Hazare ) आंदोलन के बाद जैसे तैसे एक लोकपाल की नियुक्ति भी कर दी गई थी मगर इससे हाशिल क्या हुआ ?  कहा जाता है कि लोकपाल की नियुक्ति के प्रथम वर्ष के 280 दिनो में लोकपाल ( Lokpal ) को भ्रष्टाचार की 1296 शिकायतें मिलीं थी  यहाँ यह बतलाते चलें कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए 2019 में भारत मे प्रथम लोकपाल की नियुक्ति कर दी गई थी

अन्ना हजारे
अन्ना हजारे

एक चेयरपर्सन और 4 सदस्यों सहित 20 लोगों का स्टाफ नियुक्त किया गया था  लेकिन आरटीआई ( Right to Information ) में मिले जवाब पर जाएं तो लोकपाल की स्थापना से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक यानी 280 दिनों में लोकपाल ( Lokpal )को भ्रष्टाचार की 1296 शिकायतें जरूर मिली थी लेकिन शिकायतों के आधार पर कितने लोगों की जांच हुई और उसके बाद कितने लोगों के विरूद्ध कार्रवाई की गई, इसका जवाब लोकपाल की ओर से आरटीआई में नहीं दिया गया था लोकपाल के दफ्तर में हर महीने मानदेय/वेतन, भत्तों पर कितना खर्च हो रहा है इसका भी स्पष्ट उत्तर नही दिया गया था गोलमोल जवाब देकर खाना पूरी कर दी ग ई थी

आरटीआई में लोकपाल की ओर से बताया गया था कि 27 मार्च 2019 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक लोकपाल को 1296 शिकायतें मिली थी. इसमें से 1120 शिकायतों की सुनवाई हो चुकी है. लेकिन आरटीआई में जब यह पूछा गया कि शिकायतें मिलने के बाद कितने लोगों की जांच कराई गई और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? तो इस सवाल का लोकपाल ने जवाब देते हुए कहा था कि वह अलग से इस तरह की जानकारी नहीं रखता है. कहा जाता है कि 12 कमरे वा 2 हॉल वाले दफ्तर का किराया 50 लाख रुपए महीना है …. फिलहाल दिल्ली ( Delhi )के किसी पांच सितारा होटल (  5-star hotel )मे इसका आफिस है …

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बहरहाल मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh ) मे सियासी घमासान के बीच शिवराज मंत्रीमंडल का विस्तार और अब विभागो को लेकर मची रार के बीच लोकपाल का जिक्र इसलिये कर रहा हूं ताकि लोग नेताओं की असलियत समझ सकें । अब यहाँ गौर करने लायक बात यह है कि पिछले दो दिनो से प्रदेश के प्रमुख अखबार मलाई दार मंत्रालयों की चर्चा खुलकर कर रहें है लेकिन आज तक किसी मंत्री अथवा विधायक ने गृह ( Ministry of Home ) .परिवहन ( Ministry of Transport ) .नगरीय प्रशासन जल संसाधन और राजस्व मोहकमे को मलाईदार विभाग कहे जाने पर आपत्ति नही की है जाहिर है कि राजनैतिक कारोबारियो का एक मात्र उद्देश्य धनोपार्जन ही है ….आगे मोदी जी जाने

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