FEATUREDमध्यप्रदेश

गोविंदनारायण सिंह और शिवराज की सोच मे फर्क ….

आलेख,  अशोक शुक्ला  “चौकन्ना” वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार, 

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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1967 मे बनी देश की पहली संविद सरकार कोई चौविस महीनो के बाद गिर ग ई थी कहा जाता है कि राजमाता सिंधिया के बढते हस्ताक्षेप से तंग आकर गोविंद नारायण सिंह ने संयुक्त विधायक़ दल (संविद) के गठबंधन को भंग कर दिया था और दुबारा कांग्रेस मे शामिल होने के लिये प्रयास करते रहे आपात काल के बाद इंदिरा जी ने उन्हे कांग्रेस मे शामिल भी कर लिया था बाद मे मध्यप्रदेश मे 1977 मे दूसरी बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी लेकिन यह भी ज्यादा समय तक नही चल पाई गठबंधन दलों की खींचतान के चलते पहले केन्द्र की सरकार गई और फिर इसके बाद सूबे की सरकार भी चली गई

अब 2020 मे जब 1967 की कहानी दोहराई जा रही है तब एक यह देखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर 69 मे गोविन्द नारायण सिंह को इस्तीफा देने की नौबत क्यों आई थी ? कहा जाता है कि सरकारी कामकाज मे राजमाता की बढती दखलंदाजी से तंग आकार गोविंद नारायण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था

राजेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व मंत्री

अमरपाटन के पूर्व विधायक व विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रह चुके राजेंद्र सिंह ने कहा कि संविद सरकार के मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह एक स्वाभिमानी व्यक्ति थे मान सम्मान के लिये ही उन्होने पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र का विरोध किया था और बाद मे उन्होने अपने मान सम्मान के लिये राजमाता के आगे घुटने टेकने से इंकार करते हुये मुख्यमंत्री के पद की भी परवाह नही की मगर शिवराज जी गोविंद नारायण सिंह की तरह स्वाभिमानी नही है वे सत्ता के लिये किसी भी तरह का समझौता कर सकते है मंत्रीमंडल के विस्तार से लेकर विभागों के बंटवारे तक मे जिस तरह से सिंधिया का दखल दिखलाई दे रहा है वह शिवराज की समझौता परस्त मानसिकता को दर्शाने के लिये काफी है

नागेंद्र सिंह
नागेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री

पूर्व मंत्री व नागौद के वरिष्ठ भाजपा विधायक़ नागेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार मे किसी तरह की खींचतान नही है अलबत्ताजब दूसरे दल से लोग आते है तब उन्हे पार्टी की रीतियों नीतियो मे ढलने मे थोड़ा वक्त लगता है नागेंद्र सिंह ने कहा कि वे किसे के व्यक्तिगत स्वाभिमान पर टिप्पणी नही कर सकते है इसे लेकर प्रत्येक व्यक्ति का नजरिया अलग हो सकता है शिवराज जी सबको साथ लेकर चलने मे विश्वास रखते है सिंधिया से चर्चा कर फैसला लेने मे कोई हर्ज नही है विंध्यप्रदेश को मंत्रीमंडल मे अपेक्षानुसार महत्व ना मिलने के सवाल पर नागेंद्र सिंह ने कहा कि इसको लेकर बीजेपी के विधायको मे किसी तरह का असंतोष नही है ।

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